बाड़मेर

लोग नया साल मना रहे थे, जवान तीन डिग्री तापमान में तैनात हैं

जब देश में नवर्ष मना रहा था, तब तीन डिग्री तापमान में हमारे जवान मुस्तैदी से पश्चिमी सीमा पर पहरा दे रहे थे।
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Jan 01, 2019
Rajasthan pak border

भवानीसिंह राठौड़
बाड़मेर। जब देश में नवर्ष मना रहा था, तब तीन डिग्री तापमान में हमारे जवान मुस्तैदी से पश्चिमी सीमा पर पहरा दे रहे थे। रात को अफसर जिप्सी से सरहद के किनारे-किनारे की सड़क पर चलकर हर पोस्ट पर पहुंचते हैं और रात को 1 से सुबह 3 बजे के बीच कभी भी जिप्सी पेट्रोलिंग हो सकती है।

जवान रात को ऊंट और पैदल बॉर्डर की तारबंदी के पास गश्त करते हैं। एक जवान की ड्यूटी 6 घंटे रहती है। पूरी सरहद सील रहती है। सुबह यहां खुर्रा जांच होती है, जिसमें रेत पर किसी तरह का पदचिह्न हों तो पता चल जाता है। इससे पूर्व रात को तारबंदी के पास फट्टा लगाया जाता है, जिससे सुबह कोई भी पदचिह्ल हों तो तुरंत पता चले।

1965 में यहां जीत मिली
1947 में देश आजाद हुआ तो इस सीमा से रेल व पैदल एक लाख से अधिक लोग पाकिस्तान आए और गए।
1965 भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ। इस सीमा से भारत ने फतेह हासिल की।
1971 भारत व पाकिस्तान से दूसरा युद्ध हुआ और भारत की सेनाएं सिंध को जीत आगे बढ़ गई थीं।
1999 करगिल युद्ध के समय इस सीमा को सील कर दिया गया था, सेना का भारी जमावड़ा रहा।
2005 थार एक्सप्रेस का संचालन इसी सीमा से प्रारंभ किया गया है, दोनों देशों में इस वजह से भी यहां अतिरिक्त सुरक्षा रहती है।

Published on:
01 Jan 2019 08:20 am