बाड़मेर

राजस्थान में झूठे साबित हो रहे पीएम मोदी के दावे, बिजली क्या है नहीं जानते लोग, चिमनी में ही पढ़ाई करते है बच्चे

राज्य में कई गांव ऐसे है जहां के लोगों ने बिजली अभी तक देखी ही नहीं, रात को चिमनी में पढ़ाई करने को मजबूर है बच्चे।
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Updated: 9 May 2018, 8:30 AM IST
PM modi declares electricity in all the villages but Rajasthan's village childrens study in Lantern

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भले ही दावा करें लेकिन राज्य में कई गांव ऐसे है जहां के लोगों ने बिजली अभी तक देखी ही नहीं। जी हां, केंद्र सरकार की उपब्धियां गिनाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शत प्रतिशत विद्युतीकरण का दावा कर रहे हैं, जबकि गांवों के हालात कुछ और ही है। राजस्थान के कुछ गांवों में आज भी बिजली नहीं पहुंच पाई है। बाड़मेर और सिरोही के दो गांवों में बच्चे आज भी लालटेन की रोशनी में पढ़ते है। उन्हें बिजली के बारे में जानकारी ही नहीं है। गौरतलब है कि मोदी सरकार ने कहा था कि दीन दयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना (DDUGJY) के तहत तय किए गए गांवों में निर्धारित समय से पहले ही बिजली पहुंचाई जा चुकी है। लेकिन मीडिया दावा कर रहा था कि भारत के सभी गांवों में अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। पीएम मोदी के हर घर में बिजली पहुंचाने के दावे में कितनी सच्चाई है इसकी पोल राजस्थान में खुल गई है, जहां बच्चे आज भी बिजली के अभाव में लालटेन की रोशनी में पढ़ने को मजबूर है।

सरी का पार, स्कूल 8 किमी दूर -

दिन में 8 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल आना-जाना और रात को चिमनी में पढ़ाई करना। बाड़मेर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे गांव सरी का पार में रहने वाले बच्चों की यही दिनचर्या है। ग्राम पंचायत रोहिड़ाला के गांव सरी का पार में लगभग 50 घरों की आबादी के साथ पास में छोटी-छोटी ढाणियां मिलाकर 100 घरों की आबादी है। लेकिन फिर भी गांव में अभी तक विद्युतीकरण नहीं हुआ है। सरी का पार गांव में चल रहे प्राथमिक विद्यालय को 4 किलोमीटर दूर राजस्थान उच्च प्राथमिक विद्यालय रामड़ोकर में मर्ज कर दिया गया है। इससे विद्यार्थियों को 4 किलोमीटर दूर स्कूल जाना पड़ता है। बच्चे पैदल ही स्कूल आते-जाते है।

सरी का पार गांव-

हमारी भावी पीढ़ी खतरे में है। गांव का स्कूल बंद कर दिया गया। पानी के जलदाय विभाग मनमानि पर उतरा हुआ है। दो माह से मोटर जली हुई है, रिपेयरिंग कर मोटर फिर से लगाते है तो कुछ दिन चलने के बाद मोटर फिर जल जाती है।
-रतनलाल सुथा, ग्रामीण।

बोकी भागली आज भी अंधेरे में -

सिरोही जिले के गोयली ग्राम पंचायत की बोकी भागली गांव में आज भी लोग बिजली से अनजान है। यहां वन विभाग अपनी भूमि बता रहा है और डिस्कॉम के अधिकारियों का कहना है कि विभाग लिखित में दे तो बिजली दी जा सकती है। दोनों की खींचतान में आदिवासी अंधेरे में जीवन यापन कर रहे है ग्रामीण रामाराम गरासिया ने बताया कि बिजली की समस्या को लेकर जिले कलेक्टर, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री तक ज्ञापन भेज दिए लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। बोकी भागली में करीब डेढ़ सौ घर आज भी दीपक से रोशन हो रहे है।

बोकी भागली -

एक हैक्टेयर तक जमीन हो तो हम व्यवस्था कर सकते है, इससे ज्यादा हो तो केन्द्र सरकार को लिखना पड़ता है। बसावट के डायवर्जन के बाद व्यवस्था हो सकती है। यही चूली भागली में किया था।
-संग्रामसिंह कटियार, उपवन संरक्षक, सिरोही।

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