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लूणी नदी प्रदूषण मामले में बड़ा एक्शन, बिठूजा CETP ट्रस्ट के 26 पदाधिकारियों के खिलाफ कोर्ट में परिवाद दर्ज

बालोतरा में लूणी नदी प्रदूषण मामले में राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने बड़ा कदम उठाते हुए बिठूजा सीईटीपी ट्रस्ट के अध्यक्ष समेत 26 पदाधिकारियों के खिलाफ अदालत में परिवाद पेश किया है। आरोप है कि निर्देशों की अनदेखी कर अनुपचारित या आंशिक रूप से उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट जल लूणी नदी में छोड़ा गया।

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Luni River Pollution

लूणी नदी प्रदूषण मामला (फोटो पत्रिका नेटवर्क)

बालोतरा: लूणी नदी प्रदूषण मामले में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने कानूनी कार्रवाई करते हुए बिठूजा स्थित सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) संचालित करने वाले ट्रस्ट अध्यक्ष सहित उसके 26 पदाधिकारियों के खिलाफ अदालत में परिवाद प्रस्तुत किया है। न्यायालय सिविल न्यायाधीश (वरिष्ठ खंड) एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बालोतरा में प्रस्तुत परिवाद में आरोप लगाया गया है कि मंडल के निर्देशों और जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के प्रावधानों की अवहेलना करते हुए लूणी नदी में अनुपचारित अथवा आंशिक रूप से उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट जल का निस्तारण किया गया।

मामला बालोतरा वाटर पॉल्यूशन कंट्रोल ट्रीटमेंट एंड रिसर्च फाउंडेशन ट्रस्ट (सीईटीपी) बिठूजा से जुड़ा है, जो औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट जल के संयुक्त उपचार और शून्य अपशिष्ट जल निस्तारण (जीरो डिस्चार्ज) सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है। परिवाद में बताया है कि ट्रस्ट की ओर से संचालन सहमति की शर्तों का पालन नहीं किया गया और पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी की गई।

गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने हर-हर मरूगंगे अभियान के तहत "खेत को खा रही बाड़, लूणी नदी को विषैला बना रही बिठूजा सीईटीपी" शीर्षक से खबर प्रकाशित करके प्रशासन को पूर्व में अवगत करवाया था।

सख्त निर्देश के बावजूद सामने आई अनियमितताएं

मंडल ने 10 फरवरी 2026 को जल अधिनियम की धारा 33 (ए) के तहत आदेश जारी कर लूणी नदी में किसी भी प्रकार के अनुपचारित अथवा आंशिक उपचारित अपशिष्ट जल के बहाव को तत्काल रोकने, जीरो डिस्चार्ज व्यवस्था सुनिश्चित करने, रासायनिक डोजिंग प्रणाली को प्रभावी बनाने, वेस्ट स्टेबलाइजेशन पॉन्ड्स की सफाई, एचआरटीएस तटबंधों को मजबूत करने तथा अवैध बहाव मार्गों को स्थायी रूप से बंद करने के निर्देश दिए थे।

परिवाद के अनुसार 19 मार्च 2026 एवं 16 मई 2026 को मंडल की ओर से किए गए निरीक्षणों में कई अनियमितताएं सामने आईं। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि जारी निर्देशों की पूर्ण पालना नहीं हुई तथा लूणी नदी में अनुपचारित अथवा आंशिक रूप से उपचारित अपशिष्ट जल का निस्तारण जारी रहा। इसे जल अधिनियम की धारा 33 (ए) का उल्लंघन माना गया है।

अदालत से कार्रवाई की मांग

मंडल ने न्यायालय से ट्रस्ट और उसके पदाधिकारियों को जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धाराओं 43, 44 एवं 45 के तहत दोषी ठहराकर विधिसम्मत दंड देने की मांग की है। परिवाद में ट्रस्ट अध्यक्ष सहित पदाधिकारियों को अभियुक्त बनाया है।

मामले में मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों और निरीक्षण टीम के सदस्यों को गवाह के रूप में शामिल किया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब लूणी, जोजरी और बांडी नदी प्रदूषण प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर गठित एसआईटी भी कर रही है और प्रदूषण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की गहन पड़ताल जारी है।

इनका कहना है...

मंडल की ओर से पूर्व में जारी निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए सीईटीपी बिठूजा का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान सामने आए तथ्यों एवं प्रतिवेदनों के आधार पर विधिक कार्रवाई करते हुए न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया है।
-दीपक तंवर, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, बालोतरा

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