बाड़मेर

Rajasthan News: राजस्थान के इस शहर में पानी के बिल से जनता परेशान, अब कार्रवाई की मांग

Rajasthan News: सीवरेज, अतिरिक्त सीवरेज, मीटर सर्विस के कॉलम खाली छोड़े हुए हैैं। इनमें किसी प्रकार की राशि का उल्लेख नहीं किया गया है।

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Jun 28, 2024

Rajasthan News: बाड़मेर शहर का जलदाय महकमा लापरवाही की इतनी गहरी नींद सोया हुआ हैै कि पानी के बिलों का वितरण सात-सात महीने बाद कर रहा है। उस पर भी 14 हजार और 17000 रुपए तक के बिल उपभोक्ताओं को थमाए जा रहे हैं। 4000 से ऊपर के तो अनगिनत बिल हैं। उपभोक्ताओं की शिकायत यह भी है कि बिल उनके घर तक आए ही नहीं तो भरें कैसे? बिल में उपभोग की गणना अंदाज से की जा रही है, घरों में मीटर नहीं लगे हैं। बाड़मेर शहर में बारिश के दिनों में पानी के बिलों ने आग लगा दी है। यह बिल जिस घर पर पहुंच रहे हैं, इसमें से 50 प्रतिशत लोग बिल हाथ में लेते ही झटका खा रहे हैं। पानी का बिल हजारों रुपए में आया है। सितंबर 2023 से मार्च 2024 तक का बिल थमाया जा रहा है।

17000 का बिल

पत्रिका के पास एक 17 हजार का बिल तो कई 14 से 15 हजार के बिल हैं। शहर के एक मोहल्ले की यह स्थिति है। शहरभर में इसको खंगाला जाए तो इससे भी अधिक के बिल आए हुए हैं। उपभोक्ता आरोप लगा रहे है कि बिल घर तक पहुंचे ही नहीं है। विभाग ने ऐसी कोई सुविधा नहीं दी है कि प्रतिमाह या दो माह बाद उनको अपने बकाया बिल का स्वत: पता चल जाए। यदि ऑनलाइन सिस्टम भी ऐसा हों तो लोग खुद राशि जमा करवा दें।

ब्याज भी जोड़ा

विभाग बिल जमा नहीं करवाने पर उपभोक्ताओं के ब्याज जोड़ते गए हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि उनका तो मूल भी माफ किया जाए। जिन अधिकारियों/ कर्मचारियों के कार्यकाल में समय पर उपभोक्ता को बिल नहीं पहुंचे उनके खिलाफ कार्यवाही की जाए।

मीटर है ही नहीं.. पानी उपभोग कैसे मालूम?

शहर में उपभोक्ताओं के पानी के मीटर नहीं लगे हुए हैं। ऐसे में जलदाय महकमे ने बिल में मीटर क्रमांक जीरो लिखा है। मीटर पठन की तिथि भी नहीं है। मौजूदा पठन भी खाली छोड़ा है। ऐसे में यह बिल किस आधार पर बनाया गया, यह तो विभाग ही जाने। जल उपभोग के कॉलम में जहां जितनी मर्जी हुई उतने लीटर पानी लिख दिया है।

बिजली की तरह क्यों नहीं पानी बिल

पानी का बिल मामूली हैै, लेकिन बिजली का बिल हजारों में आता हैै। शहर में 99 प्रतिशत उपभोक्ता इसका समय पर भुगतान कर रहे हैं। भुगतान नहीं होने पर तुरंत लाइट काट दी जाती है। ऐसे में उपभोक्ता भी सजग रहता हैै। जलदाय महकमे ने ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की है।

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