बाड़मेर

रॉक पार्क बने सूजेश्वर से कारेली- सभापति व ईओ नगरपरिषद बोले- विजिट करेंगे चण्डीगढ़, बीएसएफ करेगी श्रमदान

चण्डीगढ़ में केवल एक व्यक्ति नेकचंद की सोच से रॉक पार्क बना और उसे देखने अब देशभर से लोग पहुंचते है। श्रमदान ज्यादा और लागत कम की थीम पर बना।बाड़मेर का सूजेश्वर इलाका तो इतना नैसर्गिक है कि पहाडिय़ों के बीच बहुत कम लागत में खूबसूरती खिलती नजर आएगी। आयुक्त नगपरिषद व सभापति इसके लिए तैयारियों में जुट रहे है।

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Jun 18, 2023
रॉक पार्क बने सूजेश्वर से कारेली- सभापति व ईओ नगरपरिषद बोले- विजिट करेंगे चण्डीगढ़, बीएसएफ करेगी श्रमदान

बाड़मेर पत्रिका. सूजेश्वर पहाड़ी की गोद में बसी नैसर्गिक सुंदरता को पर्यटन विकास के मानचित्र पर लाने के लिए अब यहां रॉक पार्क और व्यायाम स्थल विकसित करने के लिए प्रयास शुरू होंगे। इसको लेकर सभापति ओर आयुक्त नगरपरिषद ने सैद्धांतिक स्वीकृति देते हुए मानचित्र बनाने की बात कही है। बीएसएफ अगले सप्ताह सुजेश्वर में श्रमदान कर सुजेश्वर मार्ग से इसकी शुरूआत करेगी।
राजस्थान पत्रिका के अभियान सुजेश्वर को मिले सौगात में रॉक पार्क विकसित करने का सुझाव नगरपरिषद के कारगर लगा है। नगरपरिषद के आयुक्त योगेश आचार्य ने कहा कि इस पूरे इलाके के विकास को लेकर नगरपरिषद कार्ययोजना बनाएगी। रॉक पार्क के लिए सभापति दीपक माली ने चण्डीगढ़ का पार्क देखा है और उन्होंने नगरपरिषद की टीम का आगामी दिनों में चण्डीगढ़ विजिट करवाकर इसकी थीम समझने की बात कही है। कारेली से लेकर सूजेश्वर तक के पूरे इलाके को नैसर्गिक सौंदर्य के साथ पर्यटन विकास की दृष्टि से विकसित करने का प्लान बनेगा।
बीएसएफ करेगी श्रमदान- मरूगूंज संस्थान के रघुवीरसिंह तामलौर ने बताया कि बीएसएफ के साथ मिलकर सूजेश्वर मार्ग पर श्रमदान किया जाएगा। श्रमदान के साथ ही मार्ग पर कुछ रचनात्मक कार्य होंगे ताकि यह मार्ग अलग से नजर आए। यहां पर श्रमदान के लिए आम लोगों, नगरपरिषद को भी सम्मिलित किया जाएगा।
एक्सपर्टं व्यू
कारेली, सोनतालाब और वैणासर से जुड़ा पहाडिय़ों का पूरा इलाका बाड़मेर में नैसगिज़्क सौंदयज़् और प्राकृतिक छटा का बहुत बड़ी सौगात है। इस इलाके में बाड़मेर पाकज़् विकसित किया जाए जो रेगिस्तान की तमाम खासियत और खूबियों को लिए हुए हों। नैसगिज़्क सुंदरता के साथ छेड़छाड़ की बजाय उसको और सुंदर करने के प्रयास होंगे। रॉक पाकज़् इसमें से एक है। पत्थरों से भरे पड़े इस इलाके में इन्हीं पत्थरों को ऐसे रूप देना है जैसे ये खुद अपने आप में अलग हों। यहां रेगिस्तानी पौधों की नसज़्री विकसित हों। नेचुुरल कैफे एरियां बने। संपूणज़् संभावनाएं है और इतना बड़ा इलाका। बाड़मेर का पयज़्टन का यह बहुत बड़ा क्षेत्र बन सकता है। जहां ऊंट की सवारी,घुड़सवारी, ऊंट दूध उत्पाद, मिलेट फूड जॉन, देसी घाणी और कितने ही प्रकार की सोच को शामिल किया जा सकता है। -यशोवद्धज़्न शमाज़्, आइटीआरएचडी हाटज़्,बाड़मेर चेप्टर

Published on:
18 Jun 2023 08:05 pm
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