बाड़मेर

हमारी सांस्कृतिक विरासत के संवाहक है ओरण

ओरण दिवस विशेष... -ओरण को बढ़ावा और संरक्षण के सार्थक प्रयासों की जरूरत-ग्लोबल वार्मिंग को रोकने और ऑक्सीजन की कमी को दूर करने में महत्वूपर्ण है ओरण

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हमारी सांस्कृतिक विरासत के संवाहक है ओरण

बाड़मेर. पशु-पक्षियों की शरणस्थली के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए ओरण की रक्षा और इसके बढ़ोतरी को लेकर आज ज्यादा जरूरत महसूस की जा रही है। धरती के बढ़ते तापमान को ओरण ही संतुलित रख सकते है। ओरण भूमि हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के रूप में मानी जाती रही है। आज इसका महत्व और बढ़ गया है। ग्लोबल वार्मिंग और ऑक्सीजन की हो रही कमी से पार पाने में ओरण को बढ़ाना होगा। बाड़मेर जिले में ओरण को बढ़ाने में कई लोग और संस्थाएं काम कर रही है। जिले में
बाड़मेर: यहां पर है ओरण
बाड़मेर जिले में कल्याणपुर (नागणेच्या माता) में ४५०० बीघा पर ओरण है। वहीं ढोक -विरात्रा (वांकल माता) में १८००० बीघा भूमि पर ओरण है। जिले में कुल ४६३७४ हैक्टेयर भूमि ओरण के नाम पर है। वहीं कुल ९२६ गांवों में ओरण है। जिले में बड़ी संख्या में यह ओरण यहां के पशुधन के संरक्षण के साथ सांस्कृतिक विरासत व धार्मिक मान्यताओं को संजोकर रखे हुए है।
ओरण में किस तरह के है पौधे
ओरण में वनस्पति के कई रूप नजर आते है। कहीं पर भी नहीं पनपने वाले पौधे यहां ओरण भूमि पर है। इसमें औषध की पौध भी बड़ी संख्या में मिलती है। वहीं अन्य पौधों की बहुतायता है। ओरण में रोहिड़ा, गूंदी, नीम, थोर, गूलर, गूगल, केर, खेजड़ी, देसी बबूल, जाळ, गोंद, बोरड़ी सहित अन्य कई किस्म के पेड़-पौधे यहां की सुंदरता को बढ़ाने के साथ पर्यावरण के संरक्षक के रूप में महत्वपूर्ण है।
वर्तमान स्थिति विचारणीय
ओरण को लेकर वर्तमान स्थिति विचारणीय है। संरक्षण के प्रयासों में सभी का सहयोग मिलने पर ही ओरण विद्यमान रह पाएंगे। देखने में आया है कि ओरण पर अतिक्रमण और कब्जे होने लगे है। कई लोग ओरण पर भी कब्जा करने से नहीं चूक रहे हैं। इसके लिए सभी को आगे आना होगा और ओरण बचाने के लिए सार्थक प्रयास के साथ अतिक्रमण और कब्जे के खिलाफ आवाज बुलंद करनी होगी, तभी बेहतर परिणाम आ पाएंगे और ओरण को हम सुरक्षित कर सकेंगे।

Published on:
26 Apr 2022 09:44 pm
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