
बाड़मेर. शहर से निकलने वाले गंदे पानी को कुडला स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में छोड़ा जा रहा है। प्लांट में क्षमता से अधिक पानी आने व प्लांट का सही रख रखाव नहीं होने के कारण पानी प्लांट में जाने की बजाय अब गांव में भरने लग गया है।
जैसे जैसे पानी की आवक बढ़ रही है। वैसे वैसे ग्रामीणों के माथे पर चिंता की लकीरे बढऩे लगी है। समय रहते पानी को गांव में जाने से नहीं रोका गया तो गांव के लिए खतरा बढ़ जाएगा।
कई वर्षों से चल रही समस्या
कुड़ला गांव में लगभग 3-4 वर्षों से गंदा पानी भर रहा है। ऐसे में घरों के आसपास पानी भरने से उसमें दलदल हो गया है। वहीं पानी के कारण आसपास के मकानों का डूबने की अंदेशा भी लगा रहता है। बारिश होने पर ग्रामीणों के लिए खतरा बढ़ जाता है।
स्कूल के पास पानी का भराव
गांव में बना पाबूजी का मंदिर भी पानी में डूब गया है। ऐसे में ग्रामीण मंदिर नहीं जा सकते। स्कूल व रहवासी इलाके के पास पानी भरने के छोटे बच्चों के लिए भी हरदम खतरा मंडराता रहता है। ग्रामीणों के लिए बैंक जाना भी मुश्किल हो जाता है।
प्रशासन से मिलता है आश्वासन
गांव में पानी निकासी को लेकर ग्रामीणों ने कई बार प्रदर्शन भी किया। लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होने जिला प्रशासन व जन प्रतिनिधियों को कई बार अवगत करवाया फिर भी समाधान नहीं हुआ। चुनावों के दौरान ग्रामीणों को हर बार समस्या समाधान का आश्वासन मिल रहा है लेकिन काम नहीं हुआ।
मच्छरों से बीमारियों की आशंका
गांव में पानी भरने से उसमें मच्छर उत्पन्न हो गए है। साथ ही पानी के कारण बबूल की झाडिय़ा बढऩे से भी समस्या बढ़ गई है।
जिम्मेदार बन रहे अंजान
पूर्व में आरयूडीपी की ओर से इस नाले का निर्माण करवाया गया। पाइपों की फिटिंग सहीं नहीं होने के कारण पानी लीकेज होकर बाहर आ रहा है। इसके बाद नगर परिषद की ओर से इसकी मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण वर्तमान में यह पानी गांव के लिए नासूर बन गया है। इसके बाद भी जिम्मेदार अंजान बने हुए है।
मकान डूब जाएंगे
प्लांट का पानी गांव में आने के कारण मकान डूब जाएंगे। इससे ग्रामीणों को खतरा है। कई वर्षों से समस्या है। समाधान नहीं हो रहा है।
- रूपसिंह ग्रामीण
कई बार शिकायत की
ग्रामीण 3-4 वर्षों से इस समस्या को झेल रहे है। कई बार शिकायत की लेकिन प्रशासन सुनवाई नहीं कर रहा है। - जोगेन्द्र ग्रामीण
- प्रदर्शन करेंगे
शहर का गंदा पानी गांव के लिए नासूर बन गया है। जल्द समाधान नहीं हुआ तो बड़ा नुकसान होने की संभावना है। इसको लेकर ग्रामीणों को मजबूरन प्रदर्शन करना पड़ेगा।
- देवाराम जाणी सरपंच कुड़ला