बाड़मेर

मन में कुछ और पर विधाता चाहता कुछ और: साध्वी सुरंजना

बाड़मेर शहर के जैन न्याति नोहरे में चल रहे चातुर्मास प्रचवन के दौरान गुरुवार को साध्वी सुरंजना ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि जिस प्रकार नींव के बिना मकान का महत्व नहीं उसी प्रकार सम्यकदर्शन के बिना संसारी आत्माओं का महत्व नहीं।

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Aug 10, 2018
Something else in mind, but the creator wants something else

मन में कुछ और पर विधाता चाहता कुछ और: साध्वी सुरंजना

बाड़मेर
शहर के जैन न्याति नोहरे में चल रहे चातुर्मास प्रचवन के दौरान गुरुवार को साध्वी सुरंजना ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि जिस प्रकार नींव के बिना मकान का महत्व नहीं उसी प्रकार सम्यकदर्शन के बिना संसारी आत्माओं का महत्व नहीं। उन्होने कहा कि तेरे मन कुछ और है लेकिन विधाता चाहता कुछ और है । संसार एक अनवरत और शाश्वत प्रक्रिया है सारा जीव समुदाय उसका अंग है। जो कुछ होना है वह होकर ही रहेगा। इसलिए जीवन में कर्म करते रहो। चातुर्मास समितिके चन्द्रप्रकाश बी छाजेड़ व गौतम भंसाली ने बताया कि इन्स दौरान अखंड आयम्बिल तप, अखंड तेला तप, नवकार तप, गणधर तप, दादा गुरूदेव तप आदि आयोजित हो रहे है।
पापों की आलोचना से आत्मा हल्की होती है-
बाड़मेर
शहर के आराधना भवन में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के दौरान मुनि मनितप्रभसागर ने कहा कि 18 पापस्थानकों की निरंतर आलोचना करते हुए हमारे हृदय में पश्चाताप की धारा बह रही है । संगीतमय वातावरण में पश्चाताप के बह रहे अविरल प्रवाह से हमारे पाप प्रतिपल हल्के होते जा रहे है। उन्होने कहा कि कोई सागर में जाएं और भीग न पाए ऐसा कदापि नहीं हो सकता। ठीक वैसे ही कोई अपने पापों का पश्चाताप करें । उन्होने कहा कि अहम् वह है जो हमे अर्हम् से दूर रखता है। रूपवान को रूप का अहंकार, पदस्थ को पद का अहंकार, धनवान को धन का अहंकार और ज्ञानी को ज्ञान का अहंकार है। एक न एक दिन अहंकारी का विनाश निश्चित है। पुरुष यदि माया करें तो स्त्री बनती है स्त्री माया करे तो पशु और पशु माया करे तो वह नरक में जाता है। लक्ष्मणा साध्वी ने धर्मसभा को सम्बोधित किया। खरतरगच्छ चातुर्मास व्यवस्था समिति के सदस्य बाबुलाल टी बोथरा व सुनिल छाजेड़ ने बताया कि इस मौके पर बाल कलाकार गौरव ने भजनों की पस्तुती दी।
आयोचित व्यय करना समझदारी- आचार्य कविन्द्र
बाड़मेर पत्रिका
साधना भवन में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के तहत धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए आचार्य कवीन्द्रसागर ने कहा कि मनुष्य को आय के अनुसार व्यय करना चाहिए भविष्य को ध्यान में रखते हुए वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए दान, धर्म आदि करना चाहिए और परिवार का लालन-पालन निश्चित समयावधि में करना चाहिए। उन्होने कहा कि हमें अपने कर्तव्यों का विचार करके हमें जीवन को जीना चाहिए व्यक्ति केवल वर्तमान की सोचकर जीता है। भविष्य को कैसे उज्जवल बनाएं लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कर्तव्य का पालन करना चाहिए। चातुर्मास कमेटी के नरेन्द्र जैन ने बताया कि इस मौके पर मुनि कल्ततरूसागर ने कमाई के अनुसार दान देने की बात कही। कार्यक्रम में चातुर्मास कमेटी के सचिव मेघराज श्रीश्रीमाल, बाबूलाल वडेरा, हनुमानचन्द बोहरा, चातुर्मास कमेटी अध्यक्ष बच्छराज वडेरा, वेदमल बोहरा आदि मौजूद रहे।

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Published on:
10 Aug 2018 03:36 pm
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