बाड़मेर

केंद्रीय अध्ययन दल से बोले ग्रामीण, परिवार पालें या मवेशी

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Dec 18, 2018
Speaking from the Central Study Group, Family Pet or cattle
Speaking from the Central Study Group, Family Pet or cattle

सदस्य पहुंचे गांवों में : ग्रामीणों की सुनी समस्याएं, चारा, पानी और रोजगार की हर जगह समस्या
केंद्रीय अध्ययन दल से बोले ग्रामीण, परिवार पालें या मवेशी

बाड़मेर/ शिव/ सिणधरी . केंद्रीय अध्ययन दल ने सोमवार को जिले के विभिन्न गांवों का दौरा कर सूखे से उत्पन्न स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान ग्रामीणों ने चारे एवं पानी की समस्या के साथ रोजगार नहीं मिलने की बात बताई।
केंद्रीय अध्ययन दल में कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव दिनेश कुमार, नीति आयोग के कृषि निदेशक शिवसिंह मीणा, कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण मंत्रालय के पशुपालन विभाग की असिस्टेंट कमिश्नर सुलेखा एस.एल. एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव हेमंत गेरा शामिल थे।
इससे पहले जिला मुख्यालय पर कलक्ट्रेट सभागार में बैठक के दौरान सूखे से उत्पन्न स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी ली। जिला कलक्टर नकाते ने केन्द्रीय दल को जिले में चारे, पानी की उपलब्धता, फ सलों में खराबे, प्रस्तावित कार्य योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने पेयजल परिवहन एवं पशु संरक्षण के लिए चारे की डिमांड के बारे में बताया। इस दौरान बाड़मेर पंचायत समिति की प्रधान पुष्पा चौधरी ने चारे एवं पानी की दिक्कत का उल्लेख किया। गिड़ा पंचायत समिति के प्रधान लक्ष्मणराम ने राजस्व गांव को इकाई मानते हुए पशु शिविर खोलने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि मनरेगा में अतिरिक्त रोजगार जनवरी माह से दिलवाएं। जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता हेमंत चौधरी ने बताया कि जनवरी से बाड़मेर जिले में 350 स्थानों पर टैंकर से जलापूर्ति शुरू करनी पड़ेगी। बारिश होने तक करीब 1250 स्थानों पर टैंकर से जलापूर्ति की जरूरत रहेगी। दल ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, क्रॉप कटिंग, कृषि अनुदान के बारे में जानकारी ली।
लोगों से रू-ब-रू, स्थिति का लिया जायजा, जाने हालात
जिले के सणपा फांटा, टाकू बेरी, धन्ने की ढाणी, बिलासर, गेहूं, बोथिया, निम्बला, गूंगा समेत कई गांवों का दौरा कर अकाल की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान ग्रामीणों ने बताया कि इस बार पर्याप्त बारिश नहीं होने से खरीफ की फ सलों में शत- प्रतिशत खराबा है। फिलहाल चारे, पानी की दिक्कत के साथ रोजगार की समस्या है। शीघ्र पशु शिविर एवं चारा डिपो नहीं खोले गए तो पशुधन को बचाना मुश्किल हो जाएगा। चारे के भाव प्रति मण 500 रुपए हो गए हैं। अपने परिवार का गुजारा चलाने के साथ मवेशियों को पालना बेहद मुश्किल हो गया है। सणपा फांटा गांव में साजन की ढाणी निवासी मानसिंह ने बताया कि उसने 12 बीघा भूमि में खरीफ की बुवाई की थी। लेकिन पूरा खराबा हो गया। सरपंच देवी सिंह, हनुमानराम, जेठाराम समेत कई ग्रामीणों ने चारे, पानी एवं रोजगार की समस्या से अवगत कराते हुए पशु शिविर एवं चारा डिपो खोलने तथा नरेगा में अतिरिक्त रोजगार दिलाने की मांग रखी। जिला कलक्टर शिवप्रसाद मदन नकाते ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को कृषि आदान से प्रभावित किसानों की सूची अटल सेवा केंद्र पर चस्पा करने के निर्देश दिए।

Updated on:
18 Dec 2018 06:05 pm
Published on:
18 Dec 2018 11:39 am