किसी भी सफलता के कोचिंग के बजाय स्वाध्याय महत्वपूर्ण है, यह साबित कर दिखाया बाड़मेर जिले के ग्रामीण परिवेश में पढ़े लिखे शंकरसिंह पोटलिया ने।
बाड़मेर.किसी भी सफलता के कोचिंग के बजाय स्वाध्याय महत्वपूर्ण है, यह साबित कर दिखाया बाड़मेर जिले के ग्रामीण परिवेश में पढ़े लिखे शंकरसिंह पोटलिया ने। उन्होंने आरपीएससी की ओर से आयोजित कॉलेज व्याख्याता एसोसिएट प्रोफेसर इतिहास में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
स्वाध्याय ही सफलता का स्वर्णिम रास्ता है। प्रमाणिक पुस्तकों को पढ़ें और बार-बार उसी विषय वस्तु का अध्ययन करें। व्यक्ति कोई भी लक्ष्य लेकर उसके प्रति पूर्ण निष्ठा, लगन और समर्पण से जुड़ जाता है तो अवश्य ही सफल होता है। यह विचार राजकीय पीजी महाविद्यालय के एनसीसी कॉम्प्लेक्स के रूबरू सेशन में राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में इतिहास विषय में प्रथम स्थान पर चयनित शंकर सिंह पोटलिया ने व्यक्त किए ।
उन्होंने कहा कि उनका शुरू से ही यह ध्येय था कि उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर ही बनना है, इसके लिए लगातार उनकी कोशिशें जारी रही। कुछ परीक्षाओं में सफल रहे और कुछ परीक्षाओं में असफलता हाथ लगी, लेकिन मूल लक्ष्य को उन्होंने छोड़ा नहीं। इस सफलता के लिए वह पहले से ही आशान्वित थे । उन्होंने विद्यार्थियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी कोचिंग नहीं की और वो कोचिंग के बिल्कुल भी पक्षधर नहीं है। नेट, जेआरएफ और अन्य परीक्षाओं की जानकारी दी।
इस अवसर पर आदर्श किशोर ने साफा बंधवाकर स्वागत किया।सोहन राज परमार, प्रो केसाराम और पुखराज सारण ने शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन कैडेट पुष्पा ने किया और आभार लक्ष्मी ने ज्ञापित किया। हितेश सऊ , केसाराम ओमप्रकाश, जैताराम, दिनेश कुमार गोदारा सहित बड़ी संख्या में एनसीसी कैडेट्स , एयर रोवर उजास के विद्यार्थी मौजूद रहे।