- पंचायत समितियों में सैकड़ों आवेदन जमा, नहीं मिल रहा फायदा - अधिकारियों का आलस उड़े तो मिल सकता है अनुदान
बाड़मेर. जिले में सैकड़ों मजदूर बेटियां सिर्फ इसलिए स्वरोजगार नहीं पा रही है क्योंकि अधिकारी ओपीटी के चलते उनके आवेदन की कार्रवाई बीच में ही अटकाए हुए हैं। इसके चलते अनुदान अटक गया है और शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वालम्बन सहित कई सुविधाएं उनको नहीं मिल रही है। यह स्थिति जिले के हर ब्लॉक में है और जिम्मेदार अधिकारी यह कह कर इतिश्री कर रहे हैं कि और भी कई काम होने से वे ओटीपी ( वन टाइम पासवर्ड) को ऑन लाइन नहीं कर पा रहे हैं।
दिहाड़ी मजदूरी करने वाले श्रमिकों को सरकार श्रम कल्याण योजना के तहत विभिन्न योजनाओं का फायदा देती है। जिले में इस योजना से कई श्रमिक जुड़े हुए हैं। इन श्रमिकों को बावजूद इसके योजना का फायदा नहीं मिल रहा, क्योंकि जो आवेदन उन्होंने ई मित्र केन्द्रों के मार्फत पंचायत समितियों को किए हैं, वे ऑन लाइन नहीं हो पा रहे। इस चक्कर बजट के बावजूद योजनाओं का फायदा नहीं मिल रहा। गौरतलब है कि श्रमिकों की बेटियों की शादी, शिक्षा, चिकित्सा एवं अन्य कार्य पर अनुदान देय होता है। जिले में मजदूरों के सैकड़ों आवेदन पंचायत समिति के मार्फत जमा है, लेकिन अनुदान नहीं मिल रहा है।
यह आ रही परेशानी- मजदूरों को ई मित्र के मार्फत ऑन लाइन करना होता है। आवेदन जमा होते ही संबंधित पंचायत समिति के विकास अधिकारी के पास वन टाइम पासवर्ड जाता है। रजिस्टर्ड मोबाइल पर ओटीपी जाने पर आवेदन के साथ स्वीकूति जारी करने पर आवेदन प्रक्रिया पूर्ण होती है। विकास अधिकारी इस प्रक्रिया को करे, इसके लिए उन्हें कम्प्यूटर ऑपरेटर के पास बैठकर ओटीपी को आवेदन के साथ जोडऩा होता है ,लेकिन वे काम का बोझ बताते हुए एेसा नहीं कर रहे। इसके चलते अनुदान राशि अटकी हुई है।
शुभ शक्ति से नहीं मिल रहा स्वरोजगार- जिले में शुभ शक्ति योजना के तहत मजदूर की आठवीं पास बेटी, जो अठारह साल की है, उसे पचपन हजार रुपए मिलते हैं। इसके पीछे सरकार की मंशा बेटी को स्वरोजगार दिलवा आत्मनिर्भर बनाना है। जिले में 486 आवेदन इस योजना के अटके हुए हैं। इसके अलावा प्रसूति सहायता योजना, निर्माण श्रमिक शिक्षा व कौशल विकास, टूल कीट योजना, सिलिकोसिस सहायता योजना, निर्माण श्रमिक जीवन सुरक्षा योजना, दुर्घटना योजना आदि के भी सैकड़ों आवेदन ओटीपी के चक्कर में अटके हुए हैं।
लम्बे समय से काट रहा हूं चक्कर- मैंने अपनी बिटियां के स्वरोजगार को लेकर करीब एक साल पहले आवेदन किया था। चक्कर काट रहा हूं, लेकिन अभी तक अनुदान नहीं मिला। परेशान हो गया हूं।- शंकरलाल, श्रमिक बाड़मेर
अधिकारियों की ढिलाई- ओटीपी के चक्कर में अनुदान राशि अटकी हुई है। कई बार अधिकारियों को अवगत करवाया, लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा। उनकी ढिलाई का खामियाजा श्रमिक भुगत रहे हैं।- लक्ष्मण बडेरा, जिलाध्यक्ष, कमठा मजदूर यूनियन बाड़मेर
आदेश दिए हैं, होगी प्रगति- हर आवेदन पर ओटीपी की अनिवार्यता के चलते यह दिक्कत आ रही है। वैसे आवेदन निकल रहे हैं, लेकिन काफी आवेदन बाकी है। सभी विकास अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे इस कार्य को भी प्राथमिकता से करें। कार्य जल्दी ही प्रगति करेगा।- एम एल नेहरा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद बाड़मेर