प्रधानमंत्री ने नगर सेठ गुलाबचंद सालेचा का स्मरण कर जनमानस को उनके कार्यों की याद दिला दी
बालोतरा.पचपदरा में मंगलवार को रिफाइनरी शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने नगर सेठ गुलाबचंद सालेचा का स्मरण कर जनमानस को उनके कार्यों की याद दिला दी। उन्होंने कहा कि पचपदरा स्वाधीनता सेनानी गुलाबचंद सालेचा की जन्मभूमि है। उन्होंने नमक सत्याग्रह का नेतृत्व किया। पचपदरा तक रेल लाइन, पेयजल लाइन बिछाने व बाड़मेर में कॉलेज खोलने का कार्य किया। गुलाबचंद की जन्म स्थली मध्यप्रदेश के गांव गंज मसौदा थी। उस दौरान साधनों के अभाव में वे बैलगाड़ी से नाकोड़ा तीर्थदर्शन के लिए आए थे। पचपदरा निवासी नगर सेठ धनसुखदास जो निसंतान थे, इन्होंने गुलाबचंद को गोद किया। तब से ये यहीं रहने लगे। उस दौरान नमक परिवहन के लिए रेलगाड़ी नहीं थी। रेल बिछाने के खर्च को देखकर तत्कालीन ब्रिटिश राज ने इससे इनकार कर दिया था। तब उन्होंने आगे बढ़ रेल बिछाने की पैरवी की। 16 वर्ष में खर्च होने वाली राशि जितनी कमाई नहीं होने पर स्वयं की जायदाद से वसूलने की गारंटी दी। इस पर ब्रिटिश शासन ने पचपदरा तक रेल लाइन बिछाई। पचपदरा में पेयजल समस्या पर इन्होंने रेलवे स्टेशन पचपदरा से गांव पचपदरा तक स्वयं के रुपए से पेयजल लाइन बिछाई। अंग्रेज शासन काल में अंग्रेजों के अलावा अन्य किसी को नमक उत्पादन की अनुमति नहीं होने पर इन्होंने नमक उत्पादन समाज के शिष्टमण्डल के साथ शिमला में अंग्रेज रेजीमेंट से मुलाकात कर इन्हें भी नमक उत्पादन करने का अधिकार देने की मांग की। इनके मना करने पर इन्होंने सर्वप्रथम पचपदरा में नमक बनाकर अंग्रेजों के कानून को तोड़ा। नमक उत्पादक समाज को नमक उत्पादन करने का हक दिलाया। इनके चार पुत्र व चार पुत्रियां थी, इनमें से सबसे छोटे पुत्र छगनराज सालेचा जोधपुर में निवास करते हैं। मंगलवार को रिफाइनरी शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने नगर सेठ गुलाबचंद सालेचा का स्मरण कर जनमानस को उनके कार्यों की याद दिला दी। उन्होंने कहा कि पचपदरा स्वाधीनता सेनानी गुलाबचंद सालेचा की जन्मभूमि है। उन्होंने नमक सत्याग्रह का नेतृत्व किया। पचपदरा तक रेल लाइन, पेयजल लाइन बिछाने व बाड़मेर में कॉलेज खोलने का कार्य किया।