बाड़मेर पत्रिकास्थानीय जैन न्याति नोहरा में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के तहत नवपद ओली के सातवें दिन ज्ञान पद की महिमा के बारे में बताया गया। कार्यक्रम में साध्वी सुरंजना ने कहा कि ज्ञान के कारण जो मान कर लेता है तो वह ज्ञान अभिमान में परिवर्तित होकर पतन का कारण बनता है।
ज्ञान का अभिमान पतन का कारण
बाड़मेर पत्रिका
स्थानीय जैन न्याति नोहरा में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के तहत नवपद ओली के सातवें दिन ज्ञान पद की महिमा के बारे में बताया गया। कार्यक्रम में साध्वी सुरंजना ने कहा कि ज्ञान के कारण जो मान कर लेता है तो वह ज्ञान अभिमान में परिवर्तित होकर पतन का कारण बनता है। ज्ञान के साथ साथ यदि समाज में प्रतिष्ठा का भी अहंकार हो तो व्यक्तित्व अपने पथ से भटक जाता है। उन्होंने कहा कि आंख वाले व्यक्ति को यदि धुंधला दिखने लगता है तो उसे चश्मा लगाना पड़ता है। चश्मे के कांच साफ नहीं करे तो स्पष्ट दिखाई नहीं देगा उसको कांच साफ करने होंगे। उसी प्रकार हमारी आत्मा में जो राग, द्वेष व मोह रुपी मलीनता है उनको हटाए बिना हमारी आत्मा में सच्चे देव शास्त्र और गुरु के प्रति श्रद्धा नहीं हो सकती है।
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ज्ञानी की पूजा सर्वत्र
शहर के कोटडिय़ा नाहटा ग्राउण्ड में चल रहे चातुर्मास में मुनि मनितप्रभसागर ने कहा कि वस्तु के स्वभाव को जानना पद्धार्थों का बोध ज्ञान कहलाता है। वर्तमान में हम ज्ञान को नहीं अपितु धन को महत्व देते हैं, परन्तु जिस धन का आप उपार्जन कर रहे हो उसे कमाना ज्ञान से ही संभव है। जीवन में धन नहीं है तो जीवन चल सकता है परन्तु जिसके पास ज्ञान धन नहीं है उसका जीवन मुरझाए फूल की भांति है। उन्होंने कहा कि सेठ की पूजा घर तक होती है, राजा की पूजा देश तक होती है परन्तु ज्ञानी की पूजा सर्वत्र होती है।
नवपद ओली की पूजा का आयोजन
साधना भवन में आचार्य कवीन्द्रसागर ने कहा कि सम्यक चारित्र पट्ट की आराधना तीन स्तर के अंदर करनी है। पहले अशुभ में से निवृत्ति, दूसरा शुभ में प्रवृत्ति और तीसरा आत्मा के शुद्ध स्वरूप में जाग्रति। जो व्यक्ति अशुभ में से निवृत्त नहीं होता, शुभ में प्रवृत्त नहीं हो वो कभी शुद्ध में जाग्रत नहीं हो पाएगा। मुनि कल्पतरूसागर ने कहा कि सिद्ध भगवंत के अनेक गुण हैं। अनंत ज्ञान, अनंत दर्शन, अक्षयस्थिति आदि उसी तरह एक गुण बताया है अनंत चरित्र। हमें जीवन में अच्छे संकल्प लेने है। नवपद ओली की पूजा का विशेष कार्यक्रम साधना भवन में हुआ जिसमें डीसा के संगीतकार नितिन जानी ने गीतों की प्रस्तुति दी।