बाड़मेर का उत्तरलाई वायुसेना स्टेशन पाकिस्तान के लिए हमेशा आंख की किरकिरी बना हुआ है। पाक की सीमा से नजदीक यह एयर स्टेशन युद्ध के समय में पाकिस्तान के लिए सबसे घातक सिद्ध होता है।
राजस्थान में बाड़मेर का उत्तरलाई वायुसेना स्टेशन पाकिस्तान के लिए हमेशा आंख की किरकिरी बना हुआ है। पाक की सीमा से नजदीक यह एयर स्टेशन युद्ध के समय में पाकिस्तान के लिए सबसे घातक सिद्ध होता है। भारत उत्तरलाई से न केवल सबसे पहले हमला बोल सकता है, पाकिस्तान के हमले का जवाब भी दे सकता है। 1971 का युद्ध 3 दिसंबर 1971 को प्रारंभ हुआ था। थल सेना की ओर से बाखासर के रण से शुरू होकर छाछरो की ओर फतेह की जा रही थी। पाकिस्तान 8 दिसंबर तक यह समझ गया था कि अब भारतीय सेना को रोकना मुश्किल है।
उत्तरलाई वायुसेना स्टेशन 1971 के युद्ध में भी पाकिस्तान के टारगेट पर था। उत्तरलाई वायुसेना स्टेशन पर हमले को आए पाकिस्तान के विमानों को आसमान में ही भारतीय वायुसेना ने नेस्तनाबूद कर दिया था। 11 दिसंबर को भारत ने पाकिस्तान के छाछरों में तिरंगा फहरा दिया था।
पाकिस्तान ने फिर 10 दिसंबर को उत्तरलाई एयरबेस को टारगेट किया। बाड़मेर शहर के ऊपर जैसे ही पाकिस्तान के विमान नजर आए, उत्तरलाई से भारत के विमानों ने उड़ान भरी। वे बताते हैं कि खुली आंखों से बाड़मेर के लोगों ने ये आसमान की लड़ाई को देखा। इसमें पाकिस्तान के दोनों विमानों को नेस्तनाबूद किया गया। पाकिस्तान ने इस नाकामी के बाद में फिर हार मान ली।
8 दिसंबर 1971 को बाड़मेर रेलवे स्टेशन पर पाक ने हवाई हमला किया। रेलवे स्टेशन में उस वक्त डीजल के ड्रम भरे हुए थे। हमला होते ही इन ड्रम को लक्ष्मी टॉकिज की ओर ले जाया गया। इसके बाद रेलवे स्टेशन पर हुए हवाई हमले से एक व्यक्ति की जान गई थी। तत्कालीन जिला कलक्टर रहे आइसी श्रीवास्तव बताते हैं कि हमले की जानकारी मिलने के बाद वे मौके पर पहुंचे थे। यहां एक व्यक्ति का केवल हाथ नजर आया था।
11 दिसंबर को छाछरो में भारतीय तिरंगा फहराया गया और इस युद्ध में भारत ने फतेह हासिल की। अक्टूबर 1972 में हुए शिमला समझौते तक भारत के कब्जे में छाछरो तक की जमीन रही। पाकिस्तान ने इस नाकामी के बाद फिर हार मान ली।