बाड़मेर

इन गांवों में पेयजल संकट की वजह बना लूणी नदी का पानी, आखिर ऐसा क्यों? जानिए पूरी खबर

- सर्दी के मौसम में पेयजल को तरस रहे ग्रामीण, पांच माह से जलापूर्ति ठप, महंगा पानी खरीदने को लोग मजबूर

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water of Luni river caused due to drinking water crisis in villages

बालोतरा.जलदाय विभाग के अधिकारियों की अनदेखी शहर के समीपवर्ती गांवों के लिए परेशानी बनी हुईहै। लूनी नदी में पानी के बहाव से बालोतरा-खेड़- कलावा-बोरावास पेयजल लाइन के खेड़- कलावा के बीच क्षतिग्रस्त होने व जलदाय विभाग के इसे नहीं जोडऩे पर पांच माह से अधिक समय से छह गांवों के ग्रामीण पानी को तरस रहे हंै।

लूनी नदी में पानी का बहाव क्षेत्र के लिए जहां वरदान साबित हुआ, वहीं इससे विद्युत पोलों के गिरने, ट्रांसफार्मर खराब व नष्ट होने व पेयजल लाइनें बहने से डिस्कॉम व जलदाय विभाग को करोड़ों रुपयों का नुकसान हुआ। डिस्कॉम व जलदाय विभाग ने सुधार के कार्य किए, लेकिन आज भी कई कार्यअपूर्ण हंै। इससे लोगों को आज भी परेशानियां उठानी पड़ रही हैं।

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पानी खरीद बुझा रहे प्यास- लूनी नदी में पानी बहाव सूखे पांच माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज दिन तक क्षतिग्रस्त पाइप लाइन नहीं जोडऩे पर जलदाय विभाग इन गांवों में पेयजल आपूर्ति नहीं कर रहा है। इस पर गांवों के ग्रामीण बिठूजा व वरिया से टैंकरों से पानी मंगवाते हैं। टैंकर चालकों के प्रति टैंकर कीमत 800 से 1100 रुपए वसूलने से इनकी हालत खस्ताहाल हो रखी है। परेशान ग्रामीण कई बार जलदाय विभाग अधिकारियों को समस्या से अवगत करवा चुके हैं, लेकिन सुनवाईनहीं की जा रही है। नदी में पानी का बहाव क्षेत्र के लिए जहां वरदान साबित हुआ, वहीं इससे विद्युत पोलों के गिरने, ट्रांसफार्मर खराब व नष्ट होने व पेयजल लाइनें बहने से डिस्कॉम व जलदाय विभाग को करोड़ों रुपयों का नुकसान हुआ। डिस्कॉम व जलदाय विभाग ने सुधार के कार्य किए, लेकिन आज भी कई कार्यअपूर्ण हंै।

आश्वासन दे रहे, कार्रवाईनहीं-
गांव से जुड़ी पेयजल लाइन कलावा पुलिया से क्षतिग्रस्त है। कई बार जलदाय विभाग अधिकारियों को समस्या से अवगत करवाया, लेकिन आश्वासन दे रहें हैं। कार्य नहीं हो रहा है।-

मांगीलाल देवासी, खेड़
कई माह से जलापूर्ति बंद- गांव में पेयजल आपूॢत कई माह से बंद है। मोल पानी खरीदकर प्यास बुझाते हैं। महंगे दाम पर पानी खरीदने से आर्थिक् हालत खस्ता है। शिकायत पर भी सुनवाई नहीं हो रही।-

जबरसिंह तिलवाड़ा

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Published on:
09 Jan 2018 10:45 am
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