Bastar Digital Revolution: छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग तेजी से डिजिटल कनेक्टिविटी का केंद्र बन रहा है। पिछले दो वर्षों में 3200 से अधिक मोबाइल टॉवर लगने और इंटरनेट विस्तार से गांव-गांव जुड़ रहे हैं, जिससे डेटा उपयोग में 80 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
Bastar Digital Revolution: छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग, जो कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, अब तेजी से डिजिटल और संचार क्रांति का केंद्र बनता जा रहा है। मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं के विस्तार ने बस्तर की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। पिछले दो वर्षों में यहां 3,200 से अधिक मोबाइल टॉवर स्थापित किए गए हैं, जिससे दूरस्थ और जंगलों से घिरे गांव भी अब डिजिटल दुनिया से जुड़ने लगे हैं। विश्व दूरसंचार दिवस के अवसर पर सामने आए आंकड़े बताते हैं कि बस्तर संभाग में डेटा उपयोग औसतन 80 प्रतिशत तक बढ़ चुका है।
वर्तमान में सभी टेलीकॉम कंपनियों के नेटवर्क पर प्रतिमाह 42 से 45 हजार टेराबाइट तक डेटा की खपत हो रही है। यह बदलाव केवल तकनीकी सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा व्यवस्था पर भी इसका बड़ा असर दिखाई दे रहा है।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि बस्तर संभाग और सरगुजा संभाग में 5 हजार से अधिक नए मोबाइल टॉवर स्थापित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य दूरस्थ आदिवासी और वन क्षेत्रों तक निर्बाध मोबाइल एवं इंटरनेट सेवाएं पहुंचाना है ताकि हर गांव डिजिटल संचार नेटवर्क से जुड़ सके। राज्य सरकार का मानना है कि बेहतर संचार व्यवस्था से शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, ई-गवर्नेंस और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। साथ ही ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने में भी यह पहल अहम साबित होगी।
भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के आंकड़ों के अनुसार, बस्तर संभाग के 848 गांवों तक 4जी नेटवर्क पहुंचाया जा चुका है। वहीं निजी टेलीकॉम कंपनियों, विशेष रूप से Reliance Jio के आंकड़े इससे कहीं अधिक विस्तार की ओर संकेत करते हैं। सबसे अधिक नक्सल प्रभावित माने जाने वाले दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिलों के 307 गांव अब 4जी नेटवर्क से लैस हो चुके हैं। इसके अलावा 222 नए मोबाइल टॉवर लगाए जाने से 1048 गांवों तक पहली बार मोबाइल नेटवर्क कवरेज पहुंचा है।
बीएसएनएल के मुख्य महाप्रबंधक शरतचंद्र तिवारी के अनुसार, डिजिटल भारत निधि मोबाइल परियोजना के तहत बस्तर के प्रत्येक गांव तक टेलीकॉम सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है।
परियोजना के तहत अब तक 108 गांवों में मुफ्त वाई-फाई सुविधा शुरू की गई है। इससे छात्रों, युवाओं और ग्रामीणों को ऑनलाइन शिक्षा, सरकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं तक आसान पहुंच मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट उपयोग बढ़ने से ऑनलाइन भुगतान, डिजिटल बैंकिंग और ई-सेवाओं का दायरा भी तेजी से बढ़ा है।
मोबाइल नेटवर्क विस्तार का सबसे बड़ा और त्वरित असर सुरक्षा व्यवस्था पर देखने को मिला है। जिन इलाकों में पहले संचार के साधन बेहद सीमित थे, वहां अब रियल-टाइम सूचना साझा करना संभव हो पाया है। सुरक्षा एजेंसियों को अब नक्सल गतिविधियों से जुड़ी सूचनाएं तेजी से मिलने लगी हैं।
नक्सलियों की लोकेशन, मूवमेंट, हथियारों की आवाजाही और छिपे हुए ठिकानों की जानकारी सीधे मुख्यालय तक पहुंच रही है। सूचना तंत्र मजबूत होने से सुरक्षा बलों की रणनीति और कार्रवाई दोनों अधिक प्रभावी हुई हैं। इसी नेटवर्किंग और इंटेलिजेंस सिस्टम के आधार पर सुरक्षा बलों ने “मिशन 31 मार्च 2026” के तहत लगातार कई बड़े ऑपरेशन चलाए, जिनके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर में मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं के विस्तार से केवल संचार व्यवस्था ही मजबूत नहीं हुई है, बल्कि इससे सामाजिक बदलाव की नई शुरुआत भी हुई है। अब ग्रामीण छात्र ऑनलाइन पढ़ाई कर पा रहे हैं, मरीज टेलीमेडिसिन सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं और युवाओं को डिजिटल रोजगार एवं ऑनलाइन कारोबार के अवसर मिलने लगे हैं। डिजिटल कनेक्टिविटी ने दूरस्थ गांवों को प्रशासन और विकास योजनाओं से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाई है।
बस्तर में बढ़ती मोबाइल कनेक्टिविटी यह संकेत दे रही है कि राज्य अब दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में प्रस्तावित नए मोबाइल टॉवर और इंटरनेट सेवाएं बस्तर और सरगुजा को देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल क्षेत्रों में शामिल कर सकती हैं।