
बेमौसम बारिश से ‘हरे सोने’ पर संकट! भीगे तेंदूपत्ता बंडलों में लग रही दीमक, लाखों के नुकसान का खतरा(photo-patrika)
Tendu Patta News: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में “हरा सोना” कहे जाने वाले तेंदूपत्ता की खरीदी शुरू होते ही बेमौसम बारिश ने बड़ी चिंता खड़ी कर दी है। लगातार बदल रहे मौसम और अचानक हो रही बारिश से संग्रहण केंद्रों में रखी तेंदूपत्ता की हजारों गड्डियां भीग गई हैं। नमी बढ़ने के कारण अब इन बंडलों में दीमक लगने लगी है, जिससे पत्तों की गुणवत्ता खराब होने का खतरा मंडरा रहा है। वनोपज पर निर्भर हजारों ग्रामीणों और शासन दोनों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है।
कांकेर और आसपास के इलाकों में पिछले तीन दिनों से मौसम लगातार करवट बदल रहा है। दिन में तेज धूप और शाम होते-होते आंधी, बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि की स्थिति बन रही है। इस अचानक बदलते मौसम का सबसे ज्यादा असर तेंदूपत्ता की तोड़ाई और खरीदी पर पड़ा है। तेज हवाओं के कारण सुखाने के लिए रखे गए तेंदूपत्ता के बंडल उड़कर टूट रहे हैं, जबकि बारिश से बड़ी मात्रा में पत्ते भीग गए हैं।
बारिश के बाद बढ़ी नमी अब तेंदूपत्ता के लिए नई मुसीबत बन गई है। संग्रहण केंद्रों में रखे बंडलों में दीमक लगने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।ग्रामीणों के अनुसार कई बंडलों में पत्ते सड़ने लगे हैं और उन पर दीमक तेजी से फैल रही है। यदि समय रहते उचित संरक्षण नहीं किया गया तो हजारों गड्डियां खराब हो सकती हैं।
तेंदूपत्ता की गुणवत्ता उसकी सूखाई और संरक्षण पर निर्भर करती है। बारिश और नमी के कारण पत्तों का रंग, बनावट और मजबूती प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि खराब गुणवत्ता वाले पत्तों की बाजार कीमत कम हो जाती है, जिससे शासन और संग्राहकों दोनों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
जिला मुख्यालय से सटे ग्राम नवागांव के खरीदी केंद्र में स्थिति ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। यहां करीब 120 तेंदूपत्ता संग्राहक पंजीकृत हैं और अब तक लगभग 60 हजार गड्डियों की खरीदी हो चुकी है। बारिश के कारण यहां रखे हजारों बंडल भीग गए हैं। कई बंडलों में नमी बढ़ने से दीमक लगने की शिकायतें सामने आई हैं।
तेंदूपत्ता बस्तर और कांकेर क्षेत्र के हजारों ग्रामीण परिवारों की आजीविका का बड़ा सहारा है। हर साल ग्रामीण गर्मी के मौसम में जंगलों से तेंदूपत्ता तोड़कर अपनी अतिरिक्त आय अर्जित करते हैं। लेकिन इस बार मौसम की मार ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि लगातार बारिश होती रही तो उनकी मेहनत पर पानी फिर सकता है।
स्थानीय लोगों और संग्राहकों ने प्रशासन से मांग की है कि संग्रहण केंद्रों में तेंदूपत्ता को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल बेहतर व्यवस्था की जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि बंडलों को पूरी तरह ढंककर रखा जाए,नमी रोकने के लिए उचित वेंटिलेशन की व्यवस्था हो,नियमित निरीक्षण कर दीमक नियंत्रण किया जाए। यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए तो भारी मात्रा में तेंदूपत्ता खराब हो सकता है।
बारिश के बीच तेंदूपत्ता की खरीदी और संरक्षण अब वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। विभागीय अधिकारियों को गुणवत्ता बनाए रखने और नुकसान कम करने के लिए अतिरिक्त निगरानी करनी पड़ रही है।
तेंदूपत्ता को बस्तर अंचल में “हरा सोना” कहा जाता है क्योंकि इससे हजारों परिवारों को मौसमी रोजगार मिलता है। ऐसे में मौसम की यह मार न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका पर भी असर डाल सकती है।
Updated on:
08 May 2026 11:58 am
Published on:
08 May 2026 11:58 am
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