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Wild Boar Attack: जंगली सूअर का हमला, तेंदूपत्ता तोड़ने गई 5 महिलाएं गंभीर रूप से घायल

Wild Boar Attack: डोंगरगढ़ के जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने गई महिलाओं पर जंगली सूअर ने हमला कर दिया। घटना में 5 महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिनमें एक की हालत नाजुक है।

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महिलाओं पर जंगली सूअर ने हमला (photo source- Patrika)

महिलाओं पर जंगली सूअर ने हमला (photo source- Patrika)

Wild Boar Attack: छत्तीसगढ़ की धार्मिक नगरी डोंगरगढ़ के पास स्थित कोहलाकसा जंगल में एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। तेंदूपत्ता संग्रह करने गई महिलाओं के एक समूह पर अचानक जंगली सूअर ने हमला कर दिया। यह हमला इतना अचानक और खतरनाक था कि वहां मौजूद महिलाएं संभल ही नहीं पाईं और देखते ही देखते चीख-पुकार मच गई। इस घटना में पांच महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिनमें से एक की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।

Wild Boar Attack: जंगल में रोज़ी-रोटी की तलाश बनी खतरा

दरअसल, तेंदूपत्ता सीजन के दौरान ग्रामीण इलाकों के लोग बड़ी संख्या में जंगलों की ओर रुख करते हैं। तेंदूपत्ता उनके लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसी सिलसिले में चिचोला, मूंगलानी और नारायणगढ़ गांव की लगभग 10 महिलाएं एलबी नगर क्षेत्र के कोहलाकसा जंगल में पत्ते तोड़ने गई थीं। सुबह का समय था और महिलाएं अपने काम में जुटी हुई थीं, तभी झाड़ियों में छिपे एक जंगली सूअर ने अचानक उन पर हमला कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सूअर बेहद आक्रामक था और उसने बिना किसी चेतावनी के महिलाओं पर धावा बोल दिया। महिलाएं जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगीं, लेकिन हमले की तेजी के कारण कई महिलाएं उसकी चपेट में आ गईं। कुछ महिलाओं को जमीन पर गिराकर सूअर ने गंभीर रूप से घायल कर दिया।

पांच महिलाएं गंभीर रूप से घायल

इस हमले में कुल पांच महिलाएं बुरी तरह जख्मी हो गईं। घायलों में कोहलाकसा गांव की फूलबाई साहू की हालत सबसे ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। उन्हें सीने और हाथ में गहरी चोटें आई हैं, जिससे उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। अन्य घायल महिलाओं को भी शरीर के विभिन्न हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं।

घटना के तुरंत बाद अन्य ग्रामीणों और साथ गई महिलाओं ने किसी तरह घायलों को जंगल से बाहर निकाला और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद सभी को बेहतर इलाज के लिए राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

इलाके में दहशत का माहौल

इस घटना के बाद आसपास के गांवों में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में इस तरह के जंगली जानवरों की मौजूदगी पहले भी देखी गई है, लेकिन इस तरह का हमला लंबे समय बाद हुआ है। खासतौर पर महिलाएं, जो रोज़ाना जंगल जाती हैं, अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

तेंदूपत्ता सीजन के दौरान हर साल हजारों ग्रामीण जंगलों में जाते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जाते। इस घटना ने वन विभाग की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जंगलों में न तो नियमित गश्त होती है और न ही किसी प्रकार की चेतावनी या सुरक्षा मार्गदर्शन दिया जाता है।

Wild Boar Attack: ग्रामीणों की मांग

घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग से तुरंत कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जंगल में गश्त बढ़ाई जाए, खतरनाक जानवरों की निगरानी की जाए और तेंदूपत्ता तोड़ने जाने वाले लोगों को सुरक्षा के बारे में जागरूक किया जाए। इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर वन रक्षकों की तैनाती भी बढ़ाई जाए, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

वन विभाग की चुप्पी

हालांकि, इस गंभीर घटना के बावजूद अब तक वन विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी भी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक उनकी जान जोखिम में बनी रहेगी।