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Tendu Leaf Collection: तेंदूपत्ता उत्पादन का नया रिकॉर्ड संभव, अप्रैल से शुरू होगा महा-अभियान

Tendu Leaf Collection: बस्तर में अप्रैल से तेंदूपत्ता संग्रहण शुरू होगा। इस बार 2.70 लाख मानक बोरा का लक्ष्य तय किया गया है, जिसमें बीजापुर में सबसे अधिक संग्रहण की उम्मीद है।

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बस्तर में रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद (photo source- Patrika)

बस्तर में रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद (photo source- Patrika)

Tendu Leaf Collection: बस्तर में ‘‘हरा सोना’’ कहे जाने वाले तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य अप्रैल माह से शुरू होने जा रहा है। बस्तर वन वृत्त के अंतर्गत बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों में इसके लिए वन विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस वर्ष मौसम अनुकूल रहने की स्थिति में तेंदूपत्ता के बेहतर उत्पादन और रिकॉर्ड संग्रहण की संभावना जताई जा रही है।

Tendu Leaf Collection: तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य

वन विभाग के अनुसार संग्रहण कार्य अप्रैल से शुरू होकर मई माह तक चलेगा। समय पर मौसम का साथ मिला तो निर्धारित लक्ष्य आसानी से पूरा किया जा सकेगा। इस वर्ष बस्तर वृत्त को कुल 2 लाख 70 हजार 600 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य मिला है।

एक अरब से अधिक भुगतान की संभावना: अगर मौसम अच्छा रहा और तेंदूपत्ता संग्राहकों द्वारा यह लक्ष्य पूरा कर लिया जाता है तो इस साल बस्तर में करीब एक अरब रूपये से ज्यादा का भुगतान होने का अनुमान है। बीते वर्ष बस्तर संभाग में मौसम की बेरूखी से वर्षों बाद तेंदूपत्ता संग्राहण में कमी दर्ज की गई जिसके चलते मात्र 61 करोड़ 90 लाख 48 हजार रूपए का भुगतान किया गया था।

खरीदी के लिए व्यापक तैयारी

तेंदूपत्ता सीजन बस्तर के लिए केवल एक वन उपज संग्रहण नहीं, बल्कि हजारों आदिवासी परिवारों की आर्थिक मजबूती का बड़ा माध्यम है। तेंदूपत्ता खरीदी को सुचारू बनाने के लिए वन विभाग द्वारा 75 समितियां और 1710 फड़ तैयार किए गए हैं। इससे संग्राहकों को पूर्व की तरह सुविधा मिलेगी और वे आसानी से अपना संग्रहित तेंदूपत्ता बेच सकेंगे। इस वर्ष बेहतर मौसम और तैयारियों के चलते रिकॉर्ड संग्रहण की उम्मीद ने ग्रामीणों में उत्साह बढ़ा दिया है।

Tendu Leaf Collection: आदिवासियों की आजीविका का आधार ‘हरा सोना’

तेंदूपत्ता बस्तर के आदिवासी परिवारों की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। संग्रहण के दौरान पूरा परिवार इसमें जुटता है। पत्तों को तोडक़र सुखाया जाता है और फिर 50-50 पत्तों की गड्डी बनाई जाती है। ऐसी 1000 गड्डियों से एक मानक बोरा तैयार होता है। राज्य सरकार द्वारा वर्तमान में प्रति मानक बोरा 5500 रुपए का भुगतान किया जा रहा है। इसके अलावा बोनस की व्यवस्था भी होने से यह कारोबार ग्रामीणों के लिए बेहद लाभकारी साबित होता है।

तेंदूपत्ता संग्रहण को लेकर विभाग ने व्यापक और समयबद्ध तैयारी की है। सभी समितियों और फड़ों को सक्रिय कर दिया गया है, ताकि संग्राहकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। हमारा पूरा प्रयास है कि संग्रहण प्रक्रिया पारदर्शी और सुचारू रहे तथा संग्राहकों को समय पर भुगतान मिले— आलोक तिवारी, मुख्य वन संरक्षक बस्तर

तेंदूपत्ता संग्रहण लक्ष्य व भुगतान योग्य राशि