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बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं का राष्ट्रपति भवन में अभिनंदन, अमित शाह भी रहे मौजूद

Bastar Pandum 2026: राष्ट्रपति भवन में बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं और 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का विशेष सम्मान किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए स्वयं भोजन परोसा और बस्तर दशहरा में शामिल होने की इच्छा भी जताई।
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Jul 30, 2026
Bastar Pandum 2026
Bastar Pandum 2026: राष्ट्रपति भवन में पहली बार दिखा बस्तर का सांस्कृतिक वैभव(photo-patrika)

Bastar Pandum 2026: राष्ट्रपति भवन में गुरुवार को एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण देखने को मिला, जब छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल से पहुंचे 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का विशेष सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता, मांझी-चालकी, पद्मश्री सम्मानित हस्तियां, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने न केवल प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत किया, बल्कि स्वयं सभी अतिथियों को भोजन परोसकर अपनी सादगी और संवेदनशीलता का परिचय भी दिया।

President Droupadi Murmu: राष्ट्रपति भवन में पहली बार दिखा बस्तर का सांस्कृतिक वैभव

राष्ट्रपति भवन में पहली बार बस्तर की जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा और लोक परंपराओं की ऐसी भव्य झलक देखने को मिली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि उन्होंने कई बार राष्ट्रपति भवन का दौरा किया है, लेकिन पहली बार यहां इतने बड़े आदिवासी प्रतिनिधिमंडल को देखकर उन्हें विशेष प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि यह केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि का प्रतीक है।

राष्ट्रपति ने जताई बस्तर दशहरा में शामिल होने की इच्छा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल के साथ अनौपचारिक बातचीत करते हुए बस्तर की संस्कृति और परंपराओं के प्रति अपना विशेष लगाव व्यक्त किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के आग्रह पर उन्होंने भविष्य में बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा उनके हृदय को विशेष रूप से स्पर्श करता है। राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि उनका मांझी समुदाय से आत्मीय संबंध रहा है और उनके पिता भी मांझी थे।

बस्तर पंडुम ने दिलाई नई पहचान

राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर पंडुम ने छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। ऐसे आयोजनों से युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है और पर्यटन तथा स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने विश्वास जताया कि बस्तर के कलाकार, शिल्पकार और युवा अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

'झिटकू-मिटकी' स्मृति-चिह्न किया भेंट

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति को बस्तर की 300 वर्ष पुरानी प्रेमगाथा पर आधारित 'झिटकू-मिटकी' की कलाकृति भेंट की। यह स्मृति-चिह्न बस्तर की लोकआस्था, प्रेम, त्याग और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है। कार्यक्रम के अंत में प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण भी किया और देश की संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक विरासत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

Updated on:
30 Jul 2026 07:22 pm
Published on:
30 Jul 2026 07:20 pm