15 अगस्त 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Bastar Independence Day: 79 साल बाद बदला बस्तर का इतिहास, 92 गांवों में पहली बार फहराएगा तिरंगा

Independence Day Celebration: आजादी के 79 साल बाद बस्तर के 92 नक्सल प्रभावित गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया जाएगा। यह बदलते बस्तर, शांति और लोकतंत्र की नई शुरुआत का प्रतीक होगा।
2 min read
Google source verification
Bastar Independence Day

Bastar Independence Day: 79 साल बाद बदला बस्तर का इतिहास(photo-patrika)

Bastar Independence Day: देश की आजादी के 79 साल बाद बस्तर के उन सुदूर और दुर्गम गांवों में भी इस स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा पूरे सम्मान और गर्व के साथ फहराया जाएगा, जहां चार दशकों तक नक्सली हिंसा के कारण राष्ट्रीय पर्व मनाना भी चुनौती बना हुआ था। इस वर्ष बस्तर संभाग के 92 गांवों में पहली बार स्वतंत्रता दिवस का सार्वजनिक आयोजन होगा। इनमें बीजापुर के 33, सुकमा के 50 और नारायणपुर के 9 गांव शामिल हैं। यह केवल ध्वजारोहण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भय और हिंसा से निकलकर लोकतंत्र, विकास और सामान्य जीवन की ओर लौटते बस्तर की नई शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है।

First Time Flag Hoisting: चार दशक बाद बदली तस्वीर

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय तक स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों का आयोजन सुरक्षा कारणों से संभव नहीं हो पाता था। कई गांवों में प्रशासन की पहुंच सीमित थी और ग्रामीण खुले तौर पर राष्ट्रीय कार्यक्रमों में शामिल होने से भी डरते थे। अब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और विकास कार्यों के विस्तार के बाद हालात तेजी से बदल रहे हैं।

ताड़मेटला से टेकलगुड़ेम तक बदलाव की नई कहानी

एक समय नक्सली हिंसा के लिए चर्चित रहे ताड़मेटला, सिलगर, टेकलगुड़ेम, धरानी बोदली और एर्राबोर जैसे इलाके अब बदलाव की नई मिसाल बन रहे हैं। जिन क्षेत्रों में कभी गोलियों की आवाज और दहशत का माहौल था, वहां अब तिरंगा शांति, विश्वास और विकास का प्रतीक बनकर लहराएगा। पहली बार अपने गांव में राष्ट्रध्वज फहराने को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

92 गांवों में पहली बार होगा ध्वजारोहण

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बस्तर संभाग के 92 गांवों में पहली बार तिरंगा पूरे सम्मान के साथ फहराया जाएगा। इनमें बीजापुर जिले के 33, सुकमा जिले के 50 और नारायणपुर जिले के 9 गांव शामिल हैं। वर्षों तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे इन गांवों में इस बार प्रशासन और सुरक्षा बलों की मौजूदगी में स्वतंत्रता दिवस का आयोजन उत्साह और उल्लास के साथ किया जाएगा। यह ध्वजारोहण केवल राष्ट्रीय पर्व का उत्सव नहीं, बल्कि शांति, सुरक्षा, लोकतंत्र और विकास की दिशा में बस्तर के बदलते स्वरूप का प्रतीक भी होगा।

शहीदों के सम्मान में विशेष पहल

बस्तर में शांति स्थापना के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले सुरक्षा बलों के जवानों की स्मृति को हमेशा जीवित रखने के लिए भी विशेष पहल की गई है। संभाग के 500 से अधिक स्कूलों, सामुदायिक भवनों, चौराहों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों का नाम शहीद जवानों के नाम पर रखा जाएगा। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को उनके साहस, बलिदान और राष्ट्रसेवा से प्रेरित करना है।

लोकतंत्र और विकास की नई पहचान

बस्तर में तिरंगे का यह ऐतिहासिक ध्वजारोहण केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र में लौटती शांति, बढ़ते विश्वास और विकास की नई पहचान है। वर्षों तक हिंसा से प्रभावित रहे गांवों में अब राष्ट्रीय ध्वज का सम्मानपूर्वक फहराया जाना इस बात का संकेत है कि बस्तर धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है। स्वतंत्रता दिवस पर ग्रामीण तिरंगे को सलामी देने के साथ-साथ देश की सुरक्षा के लिए बलिदान देने वाले सभी शहीद जवानों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।