
जगदलपुर. बस्तर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एनडीआर चंद्रा समेत तीन लोगों के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने कम्प्यूटर खरीदी मामले में एफआईआर दर्ज किया है। कम्प्यूटर की सप्लाई व गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद विवि ने इसकी जांच के लिए 6 सदस्यी जांच टीम बनाई थी। जिसकी रिपोर्ट के आधार पर यह एफआईआर धरमपुरा चौकी में दर्ज कराई गई। तीनों ही आरोपियों के खिलाफ धारा 420 व 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
गुणवत्ता पर सवाल उठने पर बनाई जांच टीम
दरअसल करीब डेढ़ साल पहले विवि में कम्प्यूटर सप्लाई के लिए एचसीएल कंपनी को ऑर्डर दिया गया था, लेकिन कंपनी की सप्लाई के पहले ही रायपुर के सप्लायर संतोष सिंह के द्वारा कम्प्यूटर की सप्लाई करने की बात सामने आई थी। वहीं सप्लाई किए गए कम्प्यूटरों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए थे।
इसके बाद मामले की जांच के लिए 6 सदस्यीय टीम बनाई गई। टीम ने करीब एक साल पूरे मामले की जांच करने के बाद रिपोर्ट दी। इसी आधार पर धरमपुरा चौकी में प्रोफेसर एनडीआर चंदा, प्रोफेसर अनुपम तिवारी व सप्लायर संतोष सिंह पर एफआई दर्ज की गई है।
बस्तर विश्वविद्यालय में 65 नग कम्प्यूटर खरीदी व उसके भुगतान को लेकर धरमपुरा चौकी में एफआईआर दर्ज होने के साल भर पहले ही कोतवाली ने भी 23 जुलाई 2016 को इसी मसले पर तत्कालीन कुलसचिव एसपी तिवारी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है।
ये हैं खास बातें :
- मामला 65 नग कम्प्यूटर खरीदी व 28 लाख 35 हजार के भुगतान का।
- इस मामले में 23 जुलाई16 को कोतवाली में ही एफआईआर दर्ज हो चुकी है।
- पहले एफआईआर के बाद पांच सदस्यीय टीम को जांच करनी थी।
- जांच नहीं होने पर मामला को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।
- दूसरी बार जांच प्रतिवेदन में एक जांचकर्ता वित्त अधिकारी अनिल तिर्की के टीप को शामिल नहीं किया गया।
- सिविल सेवा के अतर्गत शासकीय कर्मी पर सीधे एफआईआर दर्ज करने को विवि का अंर्तकलह बताया जा रहा है।