
बैतूल. एमपी के बैतूल की एक बच्ची ने कमाल कर दिखाया है। महज 5 साल की उम्र में यह बच्ची एवरेस्ट पर चढ़ गई। अपने पर्वतारोही पिता लोकेश निकजू के साथ 5 साल की प्रिशा ने 5364 मीटर यानि 17598 फीट की ऊंचाई वाले बेस कैंप तक पहुंचने का कारनामा कर दिखाया है। इसी के साथ प्रिशा ने एवरेस्ट की चढ़ाई का नया रेकॉर्ड कायम कर दिया। वह दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी पर पहुंचने वाली सबसे कम उम्र की पर्वतारोही बन गई है।
प्रिशा ने यह उपलब्धि हासिल करने के लिए 12 दिन में 130 किमी की दूरी तय की। महाराष्ट्र के ठाणे की रहने वाली प्रिशा का परिवार मूल रूप से बैतूल जिले के प्रभात पट्टन का रहने वाला है। पिता लोकेश मुंबई में आइटी इंजीनियर हैं।
प्रिशा के पिता लोकेश और मां सीमा लोकेश निकजू ने उसे इस कठिन ऊंचाई वाले ट्रेक के लिए प्रशिक्षित किया। पिता लोकेश ने बताया कि प्रिशा ने लुकला ;नेपाल में 24 मई को उनके साथ ट्रेकिंग शुरू की और एक जून को भारतीय ध्वज लहराते हुए एवरेस्ट बेस कैंप पहुंची। वह 4 जून को लुकला लौट आई।
प्रिशा का सपना भविष्य में माउंट एवरेस्ट की और ऊंची चोटियों को फतह करने का है। इस ट्रेक पर जाने से पहले वह एरोबिक्स के साथ.साथ अपने अपार्टमेंट की सीढ़ियां चढ़ने और बगीचे की दीवार पर चढ़ने के साथ रोज पांच छह मील पैदल चलती थी।
तीन साल की उम्र में महाराष्ट्र की सबसे ऊंची चोटी कलसुबाई फतह
प्रिशा ने तीन साल की उम्र में महाराष्ट्र की सबसे ऊंची चोटी कलसुबाई को फतह किया था। अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण और संबद्ध खेल संस्थान मनाली के पूर्व छात्र लोकेश निकजू की तीन बेटियों में से प्रिशा ने ही पर्वतारोहण में दिलचस्पी दिखाई। उसने अपने पिता से महत्त्वपूर्ण टिप्स सीखे।