21 अप्रैल 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

स्लॉट बुकिंग ठप, खाद संकट गहराया: बैतूल में किसानों का फूटा गुस्सा

-कलेक्ट्रेट पहुंचे किसानों ने अफसरों को घेरा, बोले, एक एकड़ वाले क्या किसान नहीं? सत्यापन गड़बड़ी और ई-टोकन व्यवस्था पर उठे सवाल। बैतूल। गेहूं उपार्जन के लिए स्लॉट बुकिंग नहीं होने, सेटेलाइट सत्यापन में गड़बड़ी और खाद वितरण की अव्यवस्थाओं से नाराज किसानों का गुस्सा मंगलवार को खुलकर सामने आ गया। कलेक्ट्रेट पहुंचे किसानों ने […]

3 min read
Google source verification
betul news

-कलेक्ट्रेट पहुंचे किसानों ने अफसरों को घेरा, बोले, एक एकड़ वाले क्या किसान नहीं? सत्यापन गड़बड़ी और ई-टोकन व्यवस्था पर उठे सवाल।

बैतूल। गेहूं उपार्जन के लिए स्लॉट बुकिंग नहीं होने, सेटेलाइट सत्यापन में गड़बड़ी और खाद वितरण की अव्यवस्थाओं से नाराज किसानों का गुस्सा मंगलवार को खुलकर सामने आ गया। कलेक्ट्रेट पहुंचे किसानों ने अधिकारियों से तीखे सवाल करते हुए कहा कि हम एक एकड़ वाले क्या बड़े किसान हैं, जो हमारे स्लॉट बुक नहीं हो रहे? हमारी सुनने वाला कोई नहीं है। साहब, आप ही हमारा स्लॉट बुक कर दो, किसानों का सम्मान करो, हमें गुमराह मत करो। यदि सेटेलाइट सत्यापन में तकनीकी गड़बड़ी है तो उसका खामियाजा किसानों को क्यों भुगतना पड़ रहा है। किसानों ने अपनी यह पीड़ा अधिकारियों के सामने व्यक्त करते हुए तत्काल स्लाट बुक किए जाने की मांग की।
किसानों द्वारा कलेक्टर को जनसुनवाई में सौंपे गए आवेदन में बताया गया कि गेहूं विक्रय के लिए पोर्टल पर स्लॉट बुकिंग की गंभीर समस्या बनी हुई है। कई किसानों के स्लॉट बुक नहीं हो रहे, जबकि कुछ मामलों में पंजीयन का सत्यापन अधूरा बताया जा रहा है। किसान मजबूरी में अपनी उपज मंडियों में कम दामों पर बेचने को विवश हैं। किसानों का आरोप है कि सरकार समर्थन मूल्य पर खरीद की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है।किसानों ने कहा कि जिले में पिछले कुछ महीनों से असमय बारिश और ओलावृष्टि ने पहले ही फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। मौसम की मार झेल चुके किसान अब सरकारी खरीद केंद्रों की तकनीकी अव्यवस्थाओं से परेशान हैं। ऐसे समय में राहत देने के बजाय व्यवस्था उन्हें और संकट में धकेल रही है। किसानों का कहना है कि जिन खेतों में फसल तैयार है, वहां समय पर खरीदी नहीं होने से नुकसान बढ़ता जा रहा है।
खाद वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल
कृषक कृष्णा चौधरी, कौशल चौधरी, नितेश वर्मा, अनिल पंडाग्रे, धीरज आवलेकर, अखिलेश झरबड़े, भगवानदास साठे, कमल वर्मा ने आरोप लगाया कि बड़े रकबे वाले किसानों या प्रभावशाली लोगों के काम पहले हो रहे हैं, जबकि छोटे और सीमांत किसान कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। यही कारण है कि अब किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। आवेदन के माध्यम से किसानों ने मांग की है कि स्लॉट बुकिंग की समस्या का तत्काल समाधान किया जाए, सेटेलाइट सत्यापन की त्रुटियां दूर की जाएं तथा खाद वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि तीन दिनों के भीतर समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ तो शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन और धरना दिया जाएगा।
बॉक्स
गोदामों में भरी खाद, किसानों के हाथ खाली: ई-टोकन व्यवस्था से बढ़ी परेशानी
फोटो 03 कैप्शन बैतूल। मंगलवार को यूरिया की रेक बैतूल पहुंची।
बैतूल। आगामी खरीफ सीजन के लिए जिला विपणन विभाग ने कागजों में यूरिया उर्वरक का अग्रिम भंडारण लक्ष्य लगभग पूरा कर लिया है, लेकिन हकीकत यह है कि किसान खाद के लिए भटक रहे हैं। गोदामों में यूरिया उपलब्ध होने के बावजूद सोसायटियों की ई-टोकन व्यवस्था और अव्यवस्थित वितरण प्रणाली ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पर्याप्त खाद नहीं मिलने से नाराज किसानों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और प्रशासन पर सवाल खड़े किए। आंकड़ों के अनुसार जिले में यूरिया का अग्रिम भंडारण लक्ष्य 22 हजार मीट्रिक टन रखा गया था, जिसके विरुद्ध 21 हजार 980 मीट्रिक टन उपलब्ध है। यानी लक्ष्य लगभग पूरा हो चुका है। इसके बावजूद किसानों को जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिलना व्यवस्था की गंभीर विफलता माना जा रहा है। दूसरी ओर डीएपी/एनपीके उर्वरक का लक्ष्य 15 हजार 500 मीट्रिक टन रखा गया था, लेकिन उपलब्धता मात्र 4 हजार 118 मीट्रिक टन है। पोटाश का लक्ष्य 1900 मीट्रिक टन के विरुद्ध केवल 511 मीट्रिक टन उपलब्ध है। इससे साफ है कि खरीफ सीजन से पहले उर्वरक प्रबंधन पूरी तरह संतुलित नहीं है। किसानों का आरोप है कि सोसायटियों में ई-टोकन प्रणाली सुविधा कम, परेशानी ज्यादा बन गई है। कई किसानों को स्लॉट ही नहीं मिल रहा, जबकि जिन्हें टोकन मिलता है उन्हें भी जरूरत से काफी कम खाद दी जा रही है। प्रति हेक्टेयर के हिसाब से तय वितरण मानक का पालन नहीं हो रहा। किसानों का कहना है कि जब पर्याप्त भंडारण है तो फिर उन्हें लाइन में लगाकर क्यों परेशान किया जा रहा है।