-नदी में महज 2 फीट पानी शेष, शहर की पेयजल व्यवस्था पर बढ़ा दबाव, नगरपालिका ने शुरू किए आपात प्रयास। बैतूल। अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह में ही माचना डैम का जलस्तर तेजी से गिरकर चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। डैम में अब महज दो फीट पानी ही शेष रह गया है, जिससे शहर […]
बैतूल। अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह में ही माचना डैम का जलस्तर तेजी से गिरकर चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। डैम में अब महज दो फीट पानी ही शेष रह गया है, जिससे शहर की पेयजल व्यवस्था पर सीधा असर पडऩे लगा है। वार्डों में पानी सप्लाई की टाइमिंग प्रभावित हो रही है और नागरिकों को अनियमित जल आपूर्ति का सामना करना पड़ रहा है। माचना डैम में पानी लगभग समाप्त होने के कारण अब शहर की पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ताप्ती बैराज पर निर्भर हो गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगरपालिका ने आपात स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए हैं। माचना नदी के आसपास स्थित किसानों के खेतों में लगे ट्यूबवेल और कुओं से मोटर पंप के जरिए पानी लाकर डैम में डाला जा रहा है, ताकि जलस्तर को न्यूनतम स्तर पर बनाए रखा जा सके। इसके साथ ही डैम के निचले हिस्से में बचे हुए पानी को भी मोटर के माध्यम से लिफ्ट कर फिल्टर प्लांट तक पहुंचाया जा रहा है।
बोर खनन किए जाने की योजना तैयार
जलशाखा प्रभारी धीरेंद्र राठौर ने बताया कि डैम का जलस्तर फिलहाल बेहद कम हो गया है, जिसे बनाए रखने के लिए वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि दो ट्यूबवेल और एक कुएं से पानी लेकर डैम में डाला जा रहा है, ताकि अप्रेल माह तक पेयजल सप्लाई जारी रखी जा सके। इसके अलावा पुराने बोरों को भी पुन: चालू करने की तैयारी की जा रही है, जिनका पानी एनीकेट में डालकर जलस्तर को सहारा दिया जाएगा। नगरपालिका ने करीब 10 से 11 बोर चिन्हित किए हैं, जिनमें से तीन से चार बोर से पानी लेना शुरू कर दिया गया है। इन बोरों से पानी डैम तक लाने के लिए पाइपलाइन, केबल, मोटर और बिजली कनेक्शन की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही, नए बोर खनन के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। योजना के तहत 10 से 12 नए बोर पेयजल टंकियों और फिल्टर प्लांट के आसपास किए जाएंगे, जिससे टंकियों को भरकर नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
ताप्ती बैराज से पेयजल सप्लाई जारी
ताप्ती बैराज से भी पानी की सप्लाई लगातार जारी है। यहां दो मोटरों को अल्टरनेट तरीके से चलाकर जल आपूर्ति बनाए रखी जा रही है, ताकि शहर में पानी की कमी न हो। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सप्लाई की टाइमिंग में कुछ बदलाव संभव है, लेकिन पेयजल आपूर्ति पूरी तरह बंद नहीं होने दी जाएगी। माचना डैम के अचानक खाली होने का एक बड़ा कारण लगातार डैम से पानी की सप्लाई किया जाना भी बताया जा रहा है। दरअसल, इस पानी का उपयोग वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में किया जाना था, लेकिन नदी में पर्याप्त पानी होने के बावजूद नियमित रूप से माचना से पानी लिया जाता रहा, जिससे जलस्तर तेजी से गिर गया। अब स्थिति यह है कि नगरपालिका के सामने पेयजल संकट खड़ा हो गया है। इसके बावजूद नगरपालिका हर संभव प्रयास कर स्थिति को नियंत्रित करने में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि अप्रेल और मई माह में भी शहरवासियों को निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि किसी प्रकार की गंभीर समस्या उत्पन्न न हो।
इनका कहना
-शहर में पेयजल सप्लाई में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने दी जाएगी। वर्तमान में खेड़ी ताप्ती बैराज से नियमित रूप से पानी की आपूर्ति की जा रही है और वहां पर्याप्त जल उपलब्ध है, जिससे गर्मी के दौरान भी सप्लाई सुचारू बनी रहेगी। ट्यूबवैल और कुओं को अधिग्रहित कर पानी लिया जा रहा है। नए बोर खनन के लिए भी आदेश जारी कर दिए गए हैं।