नवंबर माह के प्रथम सप्ताह में मप्र के इतिहास में सर्वाधिक 12 हजार 439 मेगावाट डिमांड दर्ज की
सारनी. प्रदेश में गुरुवार को बिजली की मांग एक हजार मेगावाट तक घट गई। इसकी वजह इरीगेशन लोड कम होना है। दरअसल धनतेरस के दिन प्रदेश के कई जिलों में बारिश हो गई। इससे सिंचाई का लोड कम हो गया। इसका असर यह हुआ कि नवंबर माह के प्रथम सप्ताह में जहां पूरे दिन 12 हजार मेगावाट से अधिक डिमांड रही। वहीं 8 नवंबर को डिमांड घटकर 11 हजार 500 मेगावाट के आसपास रही। गौरतलब है कि नवंबर माह के प्रथम सप्ताह में मप्र के इतिहास में सर्वाधिक 12 हजार 439 मेगावाट डिमांड दर्ज की गई। इसके बाद से ही डिमांड घटने लगी। गुरुवार को डिमांड इतनी कम हो गई कि इकाइयों को बेकिंग डाउन पर चलाना पड़ा। मांग घटने मप्र पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने भी राहत महसूस की। दरअसल डिमांड बढऩे से कोयला संकट लगातार बढ़ता जा रहा था। हालत यह है कि विदेशी कोयला तक आयात करना पड़ रहा है। फिलहाल प्रदेश के चार पॉवर प्लांटों में 2 लाख 53 हजार मीट्रिक टन कोल स्टॉक है। वहीं 4 हजार 80 मेगावाट क्षमता वाले प्रदेश के सरकारी पॉवर प्लांटों से 2950 मेगावाट विद्युत उत्पादन लिया गया।
एक नजर में प्लांटों की स्थिति
प्लांट - उत्पादन - स्टॉक
सतपुड़ा - 930 - 54,000
बिरसिंहपुर - 1100 - 64,000
सिंगाजी - 710 - 70,000
अमरकंटक - 210 - 65,000
(नोट :- विद्युत उत्पादन मेगावाट और कोल स्टॉक मीट्रिक टन में हैं।)
आगजनी से बरई में मक्का की फसल जलकर हुई राख
मुलताई. ग्राम बरई में गुरूवार दोपहर अज्ञात कारणों से एक खेत में आग लग गई जिससे खेत में लगी मक्का की फसल सहित आग जलकर स्वाहा हो गया। सूचना मिलने पर तत्काल मुलताई से फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया जिससे आसपास के खेत आगजनी की चपेट में आने से बच गए। प्राप्त जानकारी के अनुसार बरई निवासी रमेश परिहार के खेत में आग लगने की सूचना नगर पालिका में दोपहर 2 बजे मिली जिस पर फायर ब्रिगेड संचालक मनीष रगड़े सहित स्टाफ तत्काल फायर ब्रिगेड वाहन लेकर बरई पहुंचे जहां ग्रामीणों के सहयोग से आग पर काबू किया। बताया जा रहा है कि मक्का की खड़ी फसल एवं घांस जलने से किसानों को बड़ी आर्थिक क्षति हुई है।