ट्रेंचिंग ग्राउंड में 5 करोड़ का ठेका, 2 करोड़ भुगतान के बाद भी नहीं सुलझी समस्या, आक्रोशित नागरिकों ने हाईवे पर किया दो घंटे चक्काजाम बैतूल। शहर के गौठाना स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड से उठ रही जहरीली दुर्गंध और कचरा निष्पादन की बदहाल व्यवस्था ने आखिरकार स्थानीय नागरिकों के सब्र का बांध तोड़ दिया। वर्षों से […]
बैतूल। शहर के गौठाना स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड से उठ रही जहरीली दुर्गंध और कचरा निष्पादन की बदहाल व्यवस्था ने आखिरकार स्थानीय नागरिकों के सब्र का बांध तोड़ दिया। वर्षों से झेल रहे बदबू और संक्रमण के खतरे के बीच मंगलवार को गुस्साएं ंरहवासियों ने बैतूल-परासिया स्टेट हाईवे पर चक्काजाम कर प्रशासन को खुली चुनौती दे दी। सुबह 9 बजे शुरू हुआ जाम दोपहर करीब 12 बजे तक जारी रहा। इस दौरान सडक़ के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मौके पर पहुंचे सीएमओ सतीश मटसेनिया को भी नागरिकों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। हालांकि अधिकारियों ने समझाइश देने की कोशिश की, लेकिन रहवासियों ने स्पष्ट कहा कि अब आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। उन्होंने 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि ठोस समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र होगा। इधर, सूचना मिलने पर एसडीएम अभिजीत सिंह भी मौके पर पहुंचे और जाम खुलवाने का प्रयास किया। हालांकि लोगों का आक्रोश साफ दर्शा रहा था कि यह सिर्फ दुर्गंध का नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का मुद्दा है। यदि 15 दिन में समाधान नहीं हुआ तो शहर एक बड़े जनआंदोलन का साक्षी बन सकता है।
कचरे के निष्पादन का टेंडर होने के बाद भी काम अधूरा
मामले की गंभीरता इस तथ्य से भी उजागर होती है कि ट्रेंचिंग ग्राउंड में पड़े लगभग 1.35 लाख टन पुराने कचरे के वैज्ञानिक निष्पादन के लिए नगरपालिका ने करीब 5 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया था। ठेकेदार ने मशीनें लगाकर काम शुरू किया, लेकिन काम अधूरा छोड़ दिया। हैरानी की बात यह है कि काम पूरा न होने के बावजूद ठेकेदार को लगभग 2 करोड़ रुपए का भुगतान भी कर दिया गया। इसके बाद ठेकेदार ने काम करने से इनकार कर दिया और नगर पालिका मूकदर्शक बनी रही। जब मामला तूल पकडऩे लगा तो शिकायतों के बाद कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन महीनों बाद भी न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और न ही कोई जवाबदेही तय की गई। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आधा सैकड़ा से अधिक लोग प्रदर्शन में शामिल
महादेव नगर, शारदा नगर, शांति नगर और गोकुलधाम कॉलोनी सहित आसपास के क्षेत्रों के आधा सैकड़ा से अधिक लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। क्षेत्र के केतन चुरहे, संदीप, दिग्विजय, अनिल, मनीष, आशुतोष शर्मा और तखर भाकरे सहित कई रहवासियों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन नहीं किया जा रहा। नतीजतन पूरे क्षेत्र में असहनीय बदबू फैल रही है। घरों में रहना मुश्किल हो गया है और बुजुर्गों व बच्चों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। मच्छर, मक्खियों और संक्रमण फैलाने वाले कीटों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रहवासियों का कहना था कि 5 करोड़ रुपए के ठेके और 2 करोड़ रुपए के भुगतान के बावजूद यदि कचरा यथावत पड़ा है तो यह सीधी प्रशासनिक विफलता है। नागरिकों ने मांग की है कि या तो ट्रेंचिंग ग्राउंड पर तत्काल समुचित वैज्ञानिक व्यवस्था की जाए या इसे शहर से बाहर स्थानांतरित किया जाए। साथ ही ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई गई।
इनका कहना