शाम हुई तो हनुमान जी प्रतिमा को केरपानी में रखा,फिर नहीं हटीलगभग ११० वर्ष पुरानी है प्रतिमा।झल्लार के पटेल के स्वप्र में आए थे हनुमान।केरपानी स्थित हनुमान मंदिर।
बैतूल। बैतूल से परतवाड़ा मार्ग पर स्थित मुख्यालय से २५ किमी दूर ग्राम केरपानी में हनुमानजी का प्रसिद्ध मंदिर है। यह प्रतिमा लगभग ११० वर्ष पुरानी है। हनुमानजी ने ग्राम झल्लार के पटेल को स्वप्र में दर्शन दिए थे। जिसके बाद प्रतिमा की खुदाई कर इसे झल्लार लाया जा रहा था। रास्ते ेमें शाम होने से प्रतिमा को केरपानी में रखा गया। जिसके बाद यह प्रतिमा टस से मस नहीं हुई। प्रतिमा को केरपानी में स्थापित करना पड़ा। पुजारी के मुताबिक हनुमानजी की प्रतिमा बढ़ते ही जा रही है।
केरपानी मंदिर के पुजारी श्यामनाराण अग्निहोत्री ने बताया ऐसा बताया जाता है कि भगवंतराव कनाठे जो झल्लार के पटेल थे। प्रतिमा ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिए और कहा केरपानी गांव के गडि़झिरी में पीपल के वृक्ष के नीचे हनुमान जी कि प्रतिमा है। उसे खुदाई कर बाहर निकालकर लाओ। भगवंतराव पटेल ने केरपानी के ग्रामीणों को बताया। गड़ीझिरी नामक स्थान से खुदाई कर प्रतिमा को बाहर निकाला। प्रतिमा झल्लार ले जाने की तैयारी की और एक दो बैलगाड़ी नहीं बल्कि 52 बैलगाड़ी प्रतिमा को लेने पहुंची। प्रतिमा को झल्लार लाया जा रहा था। इस दौरान शाम हो गई। जिससे प्रतिमा को केरपानी में रख दिया दोबारा फिर ग्रामीण प्रतिमा लाने लगे तो प्रतिमा टस से मस नहीं हुई।
मनोकामना होती है पूरी
हनुमानजी की प्रतिमा को केरपानी में ही स्थापित कर दिया। पहले यहां एक चबूतरा था। भगवंत पटेल और ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर का निर्माण किया गया। प्रतिमा को लेने ५२ बैलगाड़ी गई थी। जिससे इस मंदिर को बावनगड़ी भी कहा जाता है। मंदिर समिति के अध्यक्ष और पूर्व विधायक शिवप्रसाद राठौर ने बताया इस मंदिर में अनेक चमत्कार होते हैं। सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वालों की मनोकामना पूरी होती है। जिससे मंदिर की प्रसिद्धि प्रदेश और अन्य प्रदेशों में हैं।
दृष्टिहीन ताप्ती से लाकर चढ़ाता था जल
मंदिर परिसर में चिचोलाढाना गांव का एक आदिवासी दृष्टिहीन युवक हनुमान जी की सेवा में निरन्तर रहता था। इस सूरदास पर मारुतिनंदन की ऐसी कृपा हुई की वह केरपानी से 5 किलोमीटर दूर ताप्ती घाट से ताप्ती का जल लाकर हनुमान जी का अभिषेक करता था। वही मंदिर के समीप कुएं से भी अकेला ही पानी भरकर लाता था और हनुमान जी को जलाभिषेक कर पूजा अर्चना करता था। सूरदास की मौत के बाद उनकी समाधि मंदिर परिसर में बनाई गई है। इस समाधि के दर्शन के बिना हनुमानजी के दर्शन अधूरे माने जाते हैं।