
बैतूल। अप्रैल माह अंतिम दौर में है और गर्मी ने अभी से तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। मई की शुरुआत के साथ जिले में भूमिगत जलस्तर और तेजी से नीचे जाने की आशंका है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर हालातों को लेकर अब तक कोई ठोस तैयारी नजर नहीं आ रही। जलसंकट गहराने के बीच सबसे अधिक फायदा बोर खनन कारोबार से जुड़े लोग उठा रहे हैं। शहर से लेकर गांव तक धड़ल्ले से नए बोर कराए जा रहे हैं, जबकि प्रशासन अभी तक प्रतिबंध लगाने जैसे जरूरी कदम तक नहीं उठा पाया है। जिले के कई हिस्सों में जलस्तर तेजी से नीचे जा चुका है। कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में तो भूमिगत जलस्त्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं। इसके बावजूद खुलेआम बोर खनन जारी है। लोग यह सोचकर मुंहमांगे दामों पर बोर खुदवा रहे हैं कि कहीं अचानक प्रतिबंध न लग जाए। दूसरी ओर बोरिंग मशीन संचालकों ने भी मौसम और मजबूरी का फायदा उठाते हुए दरों में भारी वृद्धि कर दी है।
भूमिगत जलस्तर के अंाकड़ें तक नहीं
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जिस पीएचई विभाग को हर महीने भूमिगत जलस्तर की रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए, वही विभाग बीते एक वर्ष से यह प्रक्रिया तक पूरी नहीं कर पाया है। जिले के दसों विकासखंडों से वॉटर लेवल के आंकड़े जुटाकर रिपोर्ट तैयार की जाती है, जिसके आधार पर प्रशासन बोर खनन पर रोक लगाने जैसा निर्णय लेता है। लेकिन अधिकांश ब्लॉकों से रिपोर्ट ही नहीं पहुंच रही। नतीजा यह है कि विभाग के पास जिले के वर्तमान जलस्तर का अद्यतन डेटा तक मौजूद नहीं है। सवाल यह है कि बिना आंकड़ों के प्रशासन हालातों का आंकलन कैसे कर रहा है?।
ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बिगड़ रहे हालात
गांवों में स्थिति और भयावह है। बैतूल ब्लॉक के नयेगांव में पिछले करीब 15 दिनों से पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी है। गांव में लगे दो ट्यूबवेल ही पानी का मुख्य स्रोत थे, लेकिन दोनों का जलस्तर खत्म हो जाने से पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो गई। नलों में एक बूंद पानी नहीं आ रहा। ग्रामीणों की दिनचर्या अब पानी की तलाश से शुरू होकर पानी की तलाश में ही खत्म हो रही है। कई परिवार बैलगाड़ी और साइकिल पर डिब्बे-मटके लादकर पानी ला रहे हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत प्रशासन को पहले से पता था कि गर्मी में जलस्तर नीचे चला जाता है, फिर भी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। समय रहते नए स्रोत विकसित किए जाते या टैंकर व्यवस्था बनाई जाती तो यह नौबत नहीं आती। ग्राम पंचायत आमला के अंभोरी में भी बूंद-बूंद पानी के लिए ग्रामीण तरस रहे हैं। ग्रामीणें को कुएं का गंदा पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
रात में बोरिंग मशीनें हुई सक्रिय
इधर जलसंकट बढ़ते ही जिले में बोर खनन का कारोबार तेज हो गया है। जिले में करीब 17 से 18 बोरिंग मशीनें सक्रिय बताई जा रही हैं, जो प्रतिदिन 25 से 30 बोर खनन कर रही हैं। औसतन 500 से 600 फीट पर पानी मिल रहा है। सामान्य हालातों में जहां कम गहराई पर पानी मिल जाता था, वहीं अब कई क्षेत्रों में 500 फीट तक खुदाई करनी पड़ रही है। बोरिंग मशीन संचालकों ने प्रति वर्गफीट 10 से 15 रुपए तक दर बढ़ा दी है। वर्तमान में 110 से 120 रुपए प्रति वर्गफीट तक रेट वसूला जा रहा है। यानी पानी की किल्लत अब सीधे लोगों की जेब पर भी भारी पड़ रही है। यदि समय रहते सख्ती नहीं हुई तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
इनका कहना
Published on:
20 Apr 2026 09:08 pm
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