बीजेपी विधायक ने लिखा जब एक विधायक के साथ ऐसा हो रहा तो आम दलित के साथ किस तरह का व्यवहार होता होगा।
भदोही. बसपा छोड़कर भाजपा में आए दलित विधायक दीनानाथ भाष्कर ने भी अब अपनी ही पार्टी के कई बड़े नेताओं पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया है। भाजपा की कमल संदेश बाइक रैली में मंच पर जगह न दिये जाने के बाद नाराज विधायक ने फेसबुक पर अपनी पीड़ा पोस्ट करते हुए यहां तक लिख दिया है कि “जब एक जनप्रतिनिधि के साथ के साथ इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है तो आम दलित के साथ उपरोक्त लोगों द्वारा क्या व्यवहार किया जाता होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है”। उन्होंने बिना नाम लिये ही पार्टी के जनप्रतिनिधियों पर आरोप लगाए हैं।
दीनानाथ भाष्कर इसके पहले भी कई मामलों को लेकर दिये गए बयान और उठाए गए कदम से सुर्खियां बटोर चुके हैं। भाष्कर ने हाल ही में 10 लोगों के खिलाफ दलित उत्पीड़न को लेकर एससी/एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया था। एक मामले में तो सुनवाई न होने पर वह अधिकारियों के खिलाफ धरना तक दे चुके हैं। उन्होंने दलित एक्ट को लेकर बयान भी दिया था कि किसी दलित की हिम्मत नहीं कि किसी पर झूठा एससी/एसअी एक्ट का मुकदमा कर दे।
दीनानाथ भाष्कर भाजपा में आने के पहले सपा और बसपा दोनों पार्टियों में रह चुके हैं। वह पहले भी मंत्री रहे हैं। उनकी गिनती बसपा के संस्थापक सदस्यों में से एक और कांशीराम के करीबी लोगों में होती थी।
विधायक का Facebook पोस्ट
आज दिनांक 19/11/2018 का अमर .......... समाचार पत्र पढ़ा जिसमे मेरा और मेरे बारे समाचार मे बेबुनियाद मन गढ़ंत तथा पूर्व नियोजित समाचार प्रकाशित किया गया हैं। जो सत्य से परे हैं भारतीय जनता पार्टी का कमल संदेश बाइक रैली पूरे प्रदेश मे आयोजित थी जिसके क्रम मे लगभग 250 मोटर साइकिल केन्द्रीय कार्यालय औराई से लेकर लाला नगर से होते हुए जी आई सी मैदान ज्ञानपुर पहुंचा जहां मुझे मन्च पर आने के लिए माइक से बुलाया गया। तत्पश्चात मैं मन्च पर गया लेकिन मुझे मन्च पर जगह नहीं दिया गया। मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मंच पर सभी जिमेदार लोगों के रहते हुए मंच पर बुला कर जगह नहीं देना जानबूझ कर साजिश का हिस्सा था। क्या मेरे स्थान पर जिले के कोई अन्य जन प्रतिनिधि होता तो क्या मेरे जैसा उसके साथ भी मेरे जैसा व्यवहार होता? पार्टी सबका साथ सबका विकास के पद चिन्हों पर चल रही हैं। परंतु जनपद के कुछ विकृत मनसिकता के लोग उसे अपने स्वार्थ में पूरा नही होने दे रहे हैं। पार्टी मे अनुसूचित मोर्चा बनाया और हम समर्थता कि बात करते हैं और हम हिन्दू एवम हिन्दुस्तान तथा राष्ट्रीयता के पोषक तथा मै जनता द्वारा चयनित हूं। फिर भी मुझे मंच पर जगह नहीं दिया जाना किस बात का देवतक है। इन सारी चीजों पर क्या मुझे नाराजगी जाहिर करने का क्या मुझे अधिकार नहीं है। जब एक जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यहार किया जा रहा है तो एक आम दलित के साथ उपरोक्त लोगों द्वारा क्या व्यवहार किया जाता होगा उसका अंदाज़ लगाया जा सकता हैं। डॉक्टर अम्बेडर जी ने कहा था कि मैं सबसे पहले मै भारतीय हू और अन्त में भी भारतीय हू और इसके अलावा कुछ भी नही हू । मै भी एक हिन्दू हू और राष्ट्रवादी हू परन्तु प्रमाण पत्र देने वालो को यह तय करना है कि मै क्या हू। ॥ नरेन्द्र मोदी जिंदाबाद .. आपका अपना जन सेवक ... |