
-आयकर विभाग ने दी मोहलत नप जाएंगे छुपाने वाले, शेयर बाजार से लेकर एफडी के ब्याज और प्रापर्टी सौदों की पाई-पाई है दर्ज, आइटीआर फाइल करने से पहले मिलान बेहद जरूरी
-एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (एआइएस) में दिख रही है गलत एंट्री, तो आज ही दर्ज कराएं ऑनलाइन आपत्ति
भरतपुर. आयकर रिटर्न (आइटीआर) भरने का सीजन आते ही हर करदाता जल्दी से जल्दी अपना रिटर्न फाइल करने की होड़ में लग जाता है। लेकिन क्या आपने अपने वित्तीय जनपत्री यानी एनुअल इंफॉरमेशन स्टेटमेंट (एआइएस) को देखा? अगर नहीं, तो यह जल्दबाजी सीधे आयकर विभाग के रडार पर ला सकती है। एआइएस कोई साधारण दस्तावेज नहीं है, यह आपके पेन (परमानेंट अकाउंट नंबर) से जुड़ा एक ऐसा डिजिटल आईना है, इसमें आपके सालभर के खर्चे, कमाई और निवेश का एक-एक कतरा दर्ज होता है। इसे नजरअंदाज करना यानी सीधे मुसीबत को बुलावा देना है।
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जाने एआइएस और विभाग की करदाता पर तीसरी आंख
-सैलरी और बैंक ब्याज: करदाता के बचत खाते और एफडी से मिला एक-एक रुपया।
-शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड: शेयर कब खरीदे, कब बेचे और कितना डिविडेंड (लाभांश) मिला।
-हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन: बड़ी प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री, क्रेडिट कार्ड के भारी-भरकम बिल और विदेश यात्रा के खर्च।
-टैक्स का हिसाब: करदाता का कटा हुआ टीडीएस, टीसीएस, एडवांस टैक्स और सेल्फ-असेसमेंट टैक्स।
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बिना जांचे आइटीआर भरा, तो भुगतने होंगे ये 6 गंभीर परिणाम
-अगर करदाता ने अपने वास्तविक दस्तावेजों (जैसे फॉर्म-16, बैंक स्टेटमेंट) का एआईएस से मिलान किए बिना रिटर्न दाखिल कर दिया, तो आप इन 6 दलदलों में फंस सकता है
-आय छिपाने का नोटिस: एआईएस में दिख रही आय और आपके आईटीआर में दिखाई गई आय में 1 रुपए का भी अंतर हुआ, तो विभाग तुरंत ‘मिसमैच’ का नोटिस थमा देगा।
-अटक जाएगा रिफंड: अगर आप रिफंड की आस लगाए बैठे हैं, तो गलत डेटा के कारण आपका रिफंड महीनों महीनों के लिए लटक सकता है।
-ब्याज और पेनल्टी की मार: आय कम दिखाने पर न केवल बकाया टैक्स देना होगा, बल्कि उस पर भारी ब्याज और जुर्माना (पेनल्टी) भी लगेगा।
-संशोधित रिटर्न (रिवाइज्ड रिटर्न) का चक्कर: गलती सुधारने के लिए दोबारा रिटर्न भरना पड़ेगा, जिससे आपका समय, ऊर्जा और सीए की फीस दोबारा खर्च होगी।
-स्क्रूटिनी का खतरा: यदि अंतर बड़ा हुआ, तो मामला सीधे गहरी जांच (स्क्रूटनी) में डाल दिया जाएगा, जहां करदाता को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ सकते हैं।
-भविष्य का ब्लैकलिस्ट होना: बार-बार गलतियां करने से ऐसा व्यक्ति विभाग की नजरों में एक संदिग्ध करदाता बन जाता है, जिससे हर साल उसकी फाइल की जांच होने लगती है।
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एक्सपर्ट व्यू: हथियार है फीडबैक ऑप्शन डरें नहीं, सुधारें
-एआइएस कोई पत्थर की लकीर नहीं है कई बार तकनीकी खामियों या बैंकों की गलती के कारण इसमें किसी और का ट्रांजैक्शन या गलत रकम दिखाई दे सकती है। आयकर विभाग ने इसके लिए करदाताओं के फीडबैक का एक बेहतरीन विकल्प दिया है। अगर कोई जानकारी गलत है, तो तुरंत इंफॉरमेशन इस नॉट करेक्ट या बिलॉग्स टू अदर पेन विकल्प चुनें। विभाग उस पर संज्ञान लेकर उसे दुरुस्त करता है। आंख मूंदकर एआईएस को सही ना मानें, बल्कि अपने वास्तविक दस्तावेजों के आधार पर ही आईटीआर भरें।
अतुल मितल, चार्टर्ड अकाउंटेंट