Patrika Women Safety Abhiyan: राजस्थान के मेवात में साइबर सरगना अब स्कूली बच्चों को साइबर ठगी की ट्रेनिंग दे रहे हैं। पुलिस के आंकड़ों में यह हैरान कर देने वाला खुलासा सामने आया है।
मेघश्याम पाराशर
भरतपुर। डीग जिले के मेवात में साइबर सरगना अब स्कूली बच्चों को साइबर ठगी की ट्रेनिंग दे रहे हैं। बड़ी संख्या में नाबालिगों के पढ़ाई छोड़कर ठगी के धंधे में उतारने का खुलासा हुआ है। एक साल में ठगी के मामले में पकड़े गए 119 आरोपी नाबालिग हैं। इसमें आधे से ज्यादा ऐसे हैं, जो बीच में ही स्कूल छोड़कर ठगी से जुड़े हैं। यह आंकड़ा पुलिस के लिए भी चौंकाने वाला है।
आंकड़ों के अनुसार मेवात क्षेत्र के पांच ब्लॉकों में 2024-25 सत्र में 171 छात्रों ने स्कूल छोड़ दिया। 2023-24 सत्र में यह आंकड़ा 130 और 2022-23 सत्र में केवल 96 था।
पिछले साल 71 छात्रों के साथ पहाड़ी ब्लॉक में बच्चों की ड्रॉपआउट दर सबसे अधिक थी। वहीं दो वर्षों में 2022-23 और 2023-24 में 55 और 61 छात्रों के साथ यह दर कामां में सर्वाधिक रही।
शिक्षा मंत्रालय की यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन की रिपोर्ट से पता चला है कि पिछले दो वर्षों में राजस्थान के मेवात क्षेत्र में ड्रॉपआउट दर में 78.12 प्रतिशत की वृद्धि सामने आई हैं।
पत्रिका ने स्कूल छोड़ ठगी से जुड़े एक नाबालिग शाकिर (बदला नाम) से बात की तो उसने बताया कि पहले छोटा लालच देकर काम सिखाया जाता है। उसके बाद जब पैसा आने लगता है तो वो खुद ही ठगी करने लगता है। मैं आठवीं फेल हूं, मगर मोबाइल और लैपटॉप से ठगी का हर काम तेजी से कर लेता हूं। मैं अकेला नहीं हूं, मेरे जैसे जाने कितने ही बच्चे स्कूल छोड़कर लाखों रुपए कमा रहे हैं।
केस 1 : डीग जिले में गत 7 जनवरी को कामां थाने के गांव अकबरपुर पहाड़ी में ऑनलाइन साइबर ठगों के खिलाफ कार्रवाई में पुलिस ने पांच नाबालिग सहित 15 ठगों को पकड़ा। इसमें दो नाबालिगों ने दो साल पहले स्कूल छोड़ ठगी के पेशे में उतर गए।
केस 2 : 12 जनवरी को उत्तर प्रदेश के गोवर्धन थाना पुलिस की स्पेशल टीम ने दो नाबालिग सहित तीन आरोपियों को ठगी में गिरफ्तार किया। एक नाबालिग राजस्थान के मेवात का था। उसने भी पढ़ाई छोड़ ठगी की ट्रेनिंग ली थी।
460 ठग: 18-25 आयु के
178 ठग: 25 से 30 वर्ष
65-70 आरोपी: 40 वर्ष
40 आरोपी: 50 वर्ष के
4-5 आरोपी: 60 वर्ष
पुलिस की ऑपरेशन एंटी-वायरस कार्रवाई के आंकडे़
साक्षरता में कमी के चलते यहां लोग बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते हैं। स्कूल छोड़ने वाले हर बच्चे की समस्या को समझ उसका हल जरूरी है।
-ओमप्रकाश शर्मा, सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी