
न्यायालय के फैसले के बाद आरोपियों को जेल ले जाती पुलिस। फोटो- पत्रिका
भरतपुर। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-3 ने एक मामले की सुनवाई करते हुए दो परिवारों के 23 लोगों को दोषी ठहराते हुए 12 को आजीवन कारावास और 11 को 7-7 वर्ष की सजा सुनाई है। मामले की सुनवाई के दौरान एक पक्ष के तीन आरोपियों की मौत हो चुकी थी। कोर्ट ने उन्हें भी इस मामले में दोषी माना।
अपर लोक अभियोजक धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि मामला 15 अगस्त 2015 का है। चिकसाना थाना क्षेत्र के पीपला गांव में 15 अगस्त को सरकारी स्कूल में कार्यक्रम को लेकर दोनों पक्षों में झगड़ा हुआ था। इसके बाद 16 अगस्त को एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर हमला कर दिया।
हालांकि दोनों पक्षों के बीच पूर्व की चुनावी रंजिश भी बताई गई। दयाचंद ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका भतीजा राकेश गांव के बस स्टैंड पर खड़ा था। इसी दौरान गांव के सौदान सिंह ने अपने परिजनों के साथ मिलकर राकेश के साथ मारपीट शुरू कर दी। जब राकेश को बचाने उसके परिवार के लोग पहुंचे तो आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट की।
जांच में सामने आया कि मारपीट के दौरान चरन सिंह उर्फ चन्नो ने राकेश को गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना में परिवार के अन्य सदस्यों को भी चोटें आईं। दयाचंद ने सौदान सिंह समेत 15 जनों गुलाब, मुकेश, होरीलाल, गुड्डू, करतार, चरन सिंह, ओमी, लाखन, भगवान सिंह, रघुवीर, महेश, खजान, भोजा, सौदान और राजू के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी गुलाब, करतार, होरीलाल, गुड्डू, चरन सिंह, ओमी, रघुवीर, महेश, मुकेश, भगवान सिंह, लाखन और खजान सिंह उर्फ खज्जो को आजीवन कारावास एवं 20-20 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं आरोप सिद्ध होने पर तेजपाल, अटलबिहारी, तेज सिंह, दयाचंद, नरेन्द्र, रघुवीर, प्रभु, वीरेन्द्र, चरन सिंह, दिनेश एवं टीकम निवासी पीपला को 7-7 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है।
घटना के बाद दूसरे पक्ष के श्यामलाल ने भी 16 अगस्त को चिकसाना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि दयाचंद और उसके परिजनों ने उसके परिवार पर हमला किया, जिसमें कई लोग घायल हुए। श्यामलाल ने 54 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस ने जांच के बाद 11 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया। दौराने ट्रायल कोर्ट ने इसमें चार जनों को और आरोपी माना, जिनमें से सुनवाई के दौरान भोजाराज, सौदान और राजू की मौत हो गई। हालांकि कोर्ट ने उन्हें भी दोषी माना, जबकि शेष 12 आरोपियों को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
पुलिस ने अनुसंधान के बाद कोर्ट में चालान पेश किया। सुनवाई के बाद अदालत ने दोषियों को सजा सुनाई। करीब एक दशक तक चली सुनवाई के बाद आए इस फैसले से दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद का कानूनी पटाक्षेप हो गया। फैसले के दौरान कोर्ट परिसर में दोनों पक्षों के लोगों की भारी भीड़ जुटी रही।
Published on:
11 Feb 2026 09:58 pm
