भरतपुर

शर्मनाक… वो दर्द से कराहती रही, नहीं पसीजे भगवान

- खाकी ने दिखाई रहमदिली, चार घंटे बाद वार्ड में कराया भर्ती

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Jun 30, 2020
शर्मनाक... वो दर्द से कराहती रही, नहीं पसीजे भगवान

भरतपुर . कोरोना ने हर किसी को आहत किया है, लेकिन कोरोना के खौफ की आड़ में अस्पताल प्रशासन की अनदेखी सामान्य मरीजों की पीर को खूब बढ़ा रही है। मंगलवार को आरबीएम अस्पताल के बाहर ऐसी ही कराह लोगों को सालती रही, लेकिन धरती के भगवान इस पीर के बीच भी नहीं पसीजे।
आरबीएम चिकित्सालय में मंगलवार को सविता (20) पुत्री हरी निवासी तुहिया पेट दर्द से कराहती हुई अस्पताल पहुंची। सविता कमरा नंबर 105 में ओपीडी पहुंची तो यहां मिले चिकित्सक ने पर्चे पर कुछ लिखकर दे दिया। सविता के भाई अनिल कुमार ने आरोप लगाया कि जब वह उस पर्चा को लेकर दवा काउंटर पर गया तो उसे बताया कि पर्चे पर कोई दवा नहीं लिखी है। अनिल का आरोप है कि इसके बाद वह अपनी बहन सविता तो लेकर दोबारा ओपीडी गया तो चिकित्सक ने उसे यहां से दुत्कार कर भगा दिया और कहा कि यहां कोई इलाज नहीं होगा। दवा लिख दी है। भर्ती नहीं करेंगे। अनिल का आरोप है कि जब सविता ने तेज दर्द होने की बात कहते हुए और मिन्नतें की तो दोनों को चिकित्सक ने फटकार कर कमरे से बाहर निकलवा दिया। इसके बाद सविता गेट के बाहर पड़ी गिट्टियों पर आकर दर्द से कराहती हुई लेट गई। करीब चार घंटे तक वह दर्द से तड़पते हुए बाहर पड़ी रही, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने उसकी कोई सुध नहीं ली। अनिल ने बताया कि इसके बाद कुछ पुलिसकर्मी यहां पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने सविता को 108 कमरा नंबर में दिखाया। इसके बाद सविता को मेडिकल वार्ड में भर्ती किया गया।

मंत्री साहब...कब तक छिपाई जाती रहेंगी ऐसी हरकत

यह पहला मामला नहीं है कि जब मेडिकल कॉलेज या जनाना अस्पताल में इस तरह का मामला सामने आया है। ऐसे तमाम मामले सामने आने के बाद भी उन्हें विवादित और राजनीतिक आरोप बताकर इतिश्री कर दी गई। एक ही जिले से तीन मंत्री होने के बाद भी अगर इस तरह का हाल नजर आए तो यह किसी बड़ी चिंता से कम नहीं है। अगर ऐसे लापरवाह अफसरों की कारगुजारी को ही मंत्री छिपाते रहे तो जनता का भी विश्वास उठ जाएगा। चूंकि यह कोई पहला मामला नहीं है। मंत्रियों को भी चाहिए कि चाहे अस्पताल हो या अन्य कोई सरकारी संस्था, शहर व उनकी जिम्मेदारी वाली सरकारी संस्थाओं में ऐसे लापरवाही के प्रकरणों में तुरंत कार्रवाई तय की जानी चाहिए। यह कोरोना बड़ा संकट है, लेकिन इलाज के लिए भी जरूरी है कि जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। जिलेभर से बड़ी संख्या में आने वाले मरीज बड़े विश्वास से यहां आते हैं।

जांच के नाम पर भी चलता है खेल

आरबीएम अस्पताल में लॉकडाउन के दौरान ही किडनी मरीज की डायलिसिस नहीं करने पर उसकी मौत का मामला सामने आया था। मृतक के पुत्र ने मथुरा गेट थाने में भी तहरीर दी थी। आज तक इस प्रकरण में कुछ नहीं हो सका। बल्कि हकीकत यह थी कि खुद अस्पताल के जिम्मेदारी अधिकारियों ने गलत समय बताते हुए रिपोर्ट तक बना डाली। जब इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ तो खुद अधिकारी ही जांच के नाम पर खेल करते नजर आए। मामला मंत्री के स्तर पर भी पहुंची, लेकिन यहां भी हमेशा की तरह इतनी बड़ी खामी पर पर्दा डाल दिया गया। जबकि कोरोना के समय वास्तव में डॉक्टरों ने समाज व मरीजों के हित में जान जोखिम में डालकर काम किया है, परंतु कुछ लापरवाहों की ऐसी लापरवाही पर लगाम कसना आवश्यक है।

पीडि़त पक्ष की ओर से शिकायत मिलने पर मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. नवदीप सैनी, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी आरबीएम भरतपुर

Published on:
30 Jun 2020 08:33 pm
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