
भरतपुर की ओमवती ने खड़ा किया ऐसा बिजनेस, खुद के साथ सैकड़ों महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर (पत्रिका फोटो)
भरतपुर: 'अगर महिलाएं ठान लें, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।' इस कहावत को राजस्थान के भरतपुर जिले में नदबई उपखंड क्षेत्र के गांव बैलारा की रहने वाली ओमवती ने सच साबित कर दिखाया है। आज ओमवती उन सभी महिलाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं, जो आर्थिक तंगी और सामाजिक बंधनों के कारण अपने सपनों को दबा देती हैं। करीब दो दशक पहले जिस महिला के सामने अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटाने का संकट था, वही ओमवती आज सैकड़ों महिलाओं और युवाओं को रोजगार देकर आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिख रही हैं।
बात साल 2002 की है, जब ओमवती का परिवार बेहद गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो चुका था और कमाई का कोई पक्का जरिया नहीं था। ऐसे मुश्किल हालातों में अक्सर लोग हिम्मत हार जाते हैं, लेकिन ओमवती ने हालातों के आगे घुटने टेकने के बजाय कुछ नया करने का फैसला किया।
इसी दौरान उनकी मुलाकात 'समृद्ध भारत अभियान' के निदेशक सीताराम गुप्ता से हुई। सीताराम गुप्ता से मिला मार्गदर्शन ओमवती के जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने ओमवती को न केवल तुलसी की माला बनाने का हुनर सिखाया, बल्कि काम शुरू करने के लिए जरूरी मशीनें, औजार और कच्चा माल खरीदने के लिए आर्थिक मदद भी दी।
शुरुआत बेहद चुनौतीपूर्ण थी। संसाधनों की कमी थी, काम का कोई पुराना अनुभव नहीं था और आर्थिक परेशानियां कदम-कदम पर रास्ता रोक रही थीं। लेकिन ओमवती के इरादे पक्के थे। उनकी इस मुहिम में उनके बेटे मोनू शर्मा ने भी हाथ बंटाया। मोनू ने भी इस काम की बारीकियों को सीखा और मां-बेटे की इस जोड़ी ने मिलकर छोटे स्तर पर तुलसी माला बनाने का काम शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उनकी दिन-रात की मेहनत रंग लाने लगी और कारोबार ने रफ्तार पकड़ ली।
ओमवती की सफलता के पीछे उनके परिवार का सहयोग रहा है। जब काम बढ़ने लगा, तो उनके पति ने भी इस व्यवसाय को एक नया मोड़ देने की सोची। उन्होंने तुलसी माला बनाने वाली मशीन को खुद तैयार करना सीखा। साल 2004 से उन्होंने खुद इन मशीनों का निर्माण और सप्लाई शुरू कर दी।
आज स्थिति यह है कि उनका परिवार देश के अलग-अलग राज्यों में हजारों मशीनें सप्लाई कर चुका है। मशीनों के इस कारोबार से न सिर्फ उनके परिवार की आमदनी में भारी बढ़ोतरी हुई, बल्कि उनके मुख्य व्यवसाय को भी एक मजबूत आधार मिला।
आज ओमवती न केवल अपने परिवार को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना चुकी हैं, बल्कि समाज में अपनी एक मजबूत पहचान भी दर्ज करा चुकी हैं। वह तुलसी माला के इस कारोबार से हर महीने 25 से 30 हजार रुपये तक की शानदार आय अर्जित कर रही हैं।
सबसे खास बात यह है कि उन्होंने अपनी सफलता को सिर्फ खुद तक सीमित नहीं रखा। आज उनके साथ काम करने वाली अन्य ग्रामीण महिलाएं भी हर महीने 10 से 12 हजार रुपए तक कमा रही हैं। इसके अलावा कई महिलाओं को वे 5 से 8 हजार रुपए तक का नियमित वेतन भी दे रही हैं। गांव की ये महिलाएं घर के कामकाज निपटाने के बाद रोजाना सिर्फ 4-5 घंटे काम करती हैं और अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं।
ओमवती का यह छोटा सा प्रयास अब एक बड़े व्यापारिक नेटवर्क में बदल चुका है। उनके काम का दायरा अब सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने इसका विस्तार मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, गुजरात और हरियाणा जैसे राज्यों तक कर दिया है।
इन राज्यों में भी वे ग्रामीण महिलाओं को तुलसी माला बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं और उन्हें रोजगार से जोड़ रही हैं। उनके इस प्रयास से अब तक सैकड़ों महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार का सहारा बन चुकी हैं।
तुलसी माला निर्माण की पूरी प्रक्रिया को समझाते हुए ओमवती बताती हैं कि वे इसके लिए कच्चा माल (तुलसी की लकड़ी) उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के जैत गांव से मंगवाती हैं। तुलसी की अलग-अलग वैरायटी की लकड़ी बाजार में 200 रुपए से लेकर 350 रुपए प्रति किलो तक मिलती है। 1 किलो तुलसी की लकड़ी से लगभग 20 भजन मालाएं तैयार होती हैं। इसी 1 किलो लकड़ी से गले में पहनने वाली 30 से 80 तक छोटी मालाएं बनाई जा सकती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह व्यवसाय बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है, क्योंकि इसमें लागत बहुत कम आती है और मुनाफा काफी अच्छा होता है।
ओमवती के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाली साधना शर्मा कहती हैं कि इस काम ने गांव की महिलाओं और युवाओं की किस्मत बदल दी है। अब उन्हें काम की तलाश में बाहर नहीं जाना पड़ता, बल्कि घर बैठे ही रोजगार और अच्छी आय मिल रही है।
साधना के मुताबिक, ओमवती आज गांव में सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि बदलाव की एक बड़ी प्रेरणा बन चुकी हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो और सही मार्गदर्शन मिले, तो इंसान अपनी तकदीर खुद बदल सकता है।
अपनी इस सफलता के बाद भी ओमवती रुकना नहीं चाहती हैं। उनका मानना है कि यदि सरकार और बैंक इस तरह के कुटीर उद्योगों को समय पर आर्थिक सहायता और लोन योजनाओं का लाभ दें, तो इस काम को और बड़े स्तर पर फैलाया जा सकता है। ओमवती का सपना है कि वे आने वाले समय में हजारों और ग्रामीण महिलाओं को इस काम से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाएं, ताकि किसी भी महिला को आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े।
Updated on:
21 Jun 2026 11:51 am
Published on:
21 Jun 2026 11:20 am
बड़ी खबरें
View Allभरतपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
