भरतपुर

‘8 साल की मन्नतों के बाद जन्मा था इकलौता बेटा, वो भी नहीं रहा’, कहते ही फफक पड़े पिता; भरतपुर के 2 कांवड़ियों की मौत

Kanwar yatra Accident: मेरठ-हापुड़ मार्ग पर दर्दनाक सड़क हादसे में कांवड़ियों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को मिनी ट्रक ने टक्कर मार दी। इस हादसे में 8 साल की मन्नतों के बाद जन्मे इकलौते बेटे समेत 2 कांवड़ियों की मौत हो गई और 12 से ज्यादा लोग घायल हो गए।
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Aug 23, 2026
Kanwar yatra Accident
भऱतपुर के दो कांवड़ियों की मौत (Photo-Patrika)

कुम्हेर . हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गांव लौट रहे अवार के 27 कांवड़ियों की खुशियां मेरठ पहुंचते-पहुंचते मातम में बदल गईं। शनिवार तड़के मेरठ-हापुड़ मार्ग पर खरखौदा के पास तेज रफ्तार मिनी ट्रक ने कांवड़ियों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से टक्कर मार दी। भीषण टक्कर से ट्रॉली सड़क पर पलट गई और उसमें सवार श्रद्धालु दूर जा गिरे। हादसे में कुम्हेर थाना क्षेत्र के अवार गांव निवासी दो कांवड़ियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 12 से अधिक घायल हो गए। एक घायल की हालत गंभीर होने पर उसे दिल्ली रैफर किया गया है। मृतकों की पहचान यशपाल पुत्र हुकम सिंह (18) और राजेंद्र पुत्र राधेश्याम (45) के रूप में हुई।

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और घायलों को एनसीआर मेडिकल लालपुर अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने यशपाल और राजेंद्र को मृत घोषित कर दिया। घायलों में जितेंद्र, महेश, गुड्डू शर्मा, महावीर, पुष्पेंद्र, भूरा, सुरेश और रविंद्र सहित अन्य लोग शामिल हैं। रविंद्र पुत्र प्रभुदयाल (35) की हालत गंभीर होने पर उसे हायर सेंटर दिल्ली रैफर किया गया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटवाकर यातायात सुचारू कराया। खरखौदा पुलिस के अनुसार हादसे की जांच के साथ मिनी ट्रक चालक की भूमिका भी जांची जा रही है।

पहली बार गया था जत्था

गांव अवार से पहली बार 27 कांवड़ियों का जत्था हरिद्वार से डाक कांवड़ लेने के लिए रवाना हुआ था। गुरुवार दोपहर 2 बजे गांव के बड़े मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद जत्था हरिद्वार के लिए रवाना हुआ था। डाक कांवड़ लेकर वापस लौटते समय शनिवार तड़के खरखौदा के पास हादसा हुआ। जिसमें कांवड़ियों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से मिनी ट्रक ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क पर पलट गई।

आठ साल बाद जन्मा था यशपाल, परिवार का इकलौता बेटा था

यशपाल अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी दो बड़ी बहनें हैं, दोनों की शादी हो चुकी है। परिजनों के अनुसार दोनों बहनों के जन्म के करीब आठ साल बाद यशपाल का जन्म हुआ था। बेटे की मौत की खबर सुनकर माता-पिता और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजन बार-बार यही कह रहे हैं कि "हमारे घर का चिराग बुझ गया।" हादसे की खबर से पूरे गांव में मातम छा गया।

तीन बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

दूसरे मृतक राजेंद्र अपने पीछे दो बेटियां आरती और प्रियंका तथा बेटा शिवम छोड़ गए हैं। तीनों की अभी शादी नहीं हुई है। परिजनों के अनुसार परिवार की पूरी जिम्मेदारी राजेंद्र के कंधों पर थी। अचानक हुए हादसे में उनकी मौत से परिवार बेसहारा हो गया। राजेंद्र की मौत की खबर के बाद घर में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

Updated on:
23 Aug 2026 12:53 pm
Published on:
23 Aug 2026 12:50 pm