डीग उपखण्ड के आदि बद्री व कनकाचल पर्वत को खनन मुक्त कर संरक्षित वन घोषित करने की मांग को लेकर विगत 206 दिनों से गांव पसोपा में धरने पर बैठे साधु संतों का आंदोलन जारी है।
भरतपुर. डीग उपखण्ड के आदि बद्री व कनकाचल पर्वत को खनन मुक्त कर संरक्षित वन घोषित करने की मांग को लेकर विगत 206 दिनों से गांव पसोपा में धरने पर बैठे साधु संतों का आंदोलन जारी है। आमरण अनशन पर बैठे 14 साधुओं का सोमवार को पांचवा दिन था। विधानसभा के मुख्य सचेतक महेश जोशी की पहल पर नगर के विधायक वाजिब अली व जिला प्रशासन ने सोमवार को आंदोलनकारी साधु संतों को दिए आश्वासन पर तेवर थोड़े नरम पड़े हैं। कहा कि साधु-संतों की मांग को लेकर राज्य सरकार गंभीर है पर वर्तमान में लागू आचार संहिता के कारण उनकी मांग को लेकर किसी प्रकार की कोई भी घोषणा नहीं की जा सकती।
विधायक व जिला कलक्टर ने साधु संतों से अपील की है कि वह अपना आमरण अनशन स्थगित कर इस संबंध में सरकार को ओर समय दें। ताकि आदि बद्री और कंकाचल को वन संरक्षित क्षेत्र घोषित करने की मांग को लेकर सरकार सभी जानकारी जुटाकर सकारात्मक कार्रवाई कर सके।विधायक वाजिब अली एवं डीग के कार्यवाहक एडीएम हेमंत कुमार व पुलिस उपअधीक्षक मदनलाल जैफ सहित अन्य अधिकारी गांव पसोपा धरना स्थल पर पहुंचे। जहां आमरण अनशन पर बैठे 14 साधुओं के समक्ष सरकार की मंशा बताई। इस पर संरक्षण समिति के अध्यक्ष राधा कांत शास्त्री ने विधायक और एडीएम की बात पर भरोसा जताते हुए कहा कि यह बात सही है कि वर्तमान में लागू आचार संहिता के चलते सरकार चाह कर भी हमारी मांग पर कोई घोषणा नहीं कर सकती है। पर 15 दिवस के भीतर ही मुख्यमंत्री एवं उनके सचिव निर्णायक बैठक कर हमारी हमारी मांग को पूरा करते हुए आदिबद्री व कनकाचल पर्वत को पूर्ण तहत संरक्षित करें। अन्यथा एक बड़े व ऐतिहासिक आंदोलन का विकल्प हमारे सामने खुला हुआ है। जिसकी तैयारियां जोरों पर हैं। उन्होंने कहा कि आचार संहिता खत्म होने के सात दिवस के भीतर अगर दोनों पर्वतों को संरक्षित नहीं किया गया तो सैकड़ों साधु संत व लोग अनिश्चितकालीन महापड़ाव डालेंगे। उन्होंने कहा कि साधु संतों का आमरण अनशन तो अभी हम स्थगित कर रहे हैं लेकिन साधुओं का क्रमिक अनशन तब तक जारी रहेगा। इसके बाद विधायक अली ने आमरण अनशन पर वैठे साधुओं को जल पानी व जूस पिलाया।