-भरतपुर के आरटीओ ऑफिस का कारनामा, जिला कलक्टर बोले: ऐसा करना गलत-आरटीओ कार्यालय में जिस कर्मचारी का तबादला उस जगह दूसरा ज्वॉइन कर चुका, रसूख के दबाव में रिलीव ऑर्डर ही निरस्त
भरतपुर. राज्य सरकार की ओर से 31 दिसंबर तक तबादलों का समय सीमा निर्धारित करने के बाद अब रसूख के दबाव का खेल भी शुरू हो गया है। मामला इस बार प्रादेशिक परिवहन अधिकारी कार्यालय से जुड़ा हुआ है। जहां एक कर्मचारी का तबादला होने के बाद उस जगह दूसरे ने ज्वॉइन भी कर लिया, लेकिन जब बात दबाव की आई तो उसे आदेश को ही निरस्त कर दिया गया। जबकि जानकार अधिकारियों का कहना है कि एक बार रिलीव होने के बाद रिलीव ऑर्डर को निरस्त नहीं किया जा सकता है। अगर उस कर्मचारी वापस वहां तबादला होता है तो वह मामला अलग होता है, परंतु यहां मामला बिल्कुल विपरीत सामने आया है।
जानकारी के अनुसार तीन-चार दिन पहले प्रोग्रामर पुष्पेंद्र सिंह पुत्र तालेवर सिंह का स्थानांतरण जिला कार्यालय सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग भरतपुर किया गया था। उनके स्थान पर सहायक प्रोग्रामर बहादुर सिंह को लगाया गया था। बहादुर सिंह ने ज्वॉइन भी कर लिया। आरटीओ राजेश शर्मा ने सोमवार को कार्यमुक्त होने से पहले पुष्पेंद्र सिंह को भी रिलीव कर दिया। इसके बाद वह कार्यभार जिला परिवहन अधिकारी प्रथम सत्यप्रकाश शर्मा को सौंपकर चले गए। इसके बाद डीटीओ प्रथम ने कार्यवाहक आरटीओ के हवाले से एक आदेश जारी किया गया। इसमें कहा कि कार्यालय के आदेश क्रमांक 28 दिसंबर 2020 ेसे पुष्पेंद्र सिंह पुत्र तालेवर सिंह प्रोग्रामर को स्थानांतरण के फलस्वरूप जिला कार्यालय सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग भरतपुर के लिए दोपहर पूर्व कार्यमुक्त किया गया था। परिवहन आयुक्त की ओर से सतीश कुमार प्रादेशिक परिवहन अधिकारी को दिए गए निर्देशों की अनुपालना में सतीश कुमार की ओर से दिए गए निर्देश अनुसार उक्त कार्यमुक्त आदेश तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाता है।
रसूख के दबाव में हुआ सारा खेल
बताते हैं कि इस रिलीव ऑर्डर को निरस्त करने के पीछे भी बड़ी कहानी छिपी हुई है। चूंकि जिस कर्मचारी को रिलीव किया गया था। वह पिछले करीब आठ साल से यहां कार्यरत है। वह अक्सर जो भी आरटीओ आता है उसका खास बताया जाता है। जाहिर है कि इस बार भी कुछ न कुछ ऐसा ही हुआ है। वरना आरटीओ के ज्वॉइन करने से पहले ही खास का रिलीव ऑर्डर ही निरस्त करना बड़ी बात है।
-रिलीव करने के बाद उस ऑर्डर को निरस्त नहीं किया जा सकता है। अगर ऐसा कोई मामला सामने आया है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
नथमल डिडेल
जिला कलक्टर
-संबंधित के रिलीव करने के बाद कमिशनर से प्राप्त निर्देशों के बाद ही आदेश निरस्त किया गया है। नियम के अनुसार कार्य किया है।
सत्यप्रकाश शर्मा
कार्यवाहक आरटीओ