Patrika Mahila Suraksha Abhiyaan: प्रौद्योगिकी युग में अपराधी फ्रॉड करने के लिए नित नई तकनीकों को इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन पुलिस और सरकारी एजेंसियों के पास पुरानी तकनीके ही हैं।
डीग। महिलाओं की भागीदारी सभी क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही है। महिलाओं को काम के सिलसिले में सुबह से शाम तक अपने कार्य क्षेत्र में रहना पड़ता है। इधर प्रौद्योगिकी युग में अपराधी फ्रॉड करने के लिए नित नई तकनीकों को इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन पुलिस और सरकारी एजेंसियों के पास पुरानी तकनीके ही हैं।
इनमें सुधार के साथ ही कानूनों में सजा के प्रावधान में भी संशोधन की आवश्यकता है। आपराधिक तत्वों और साइबर ठगों का आसान शिकार महिलाएं ही होती हैं, ऐसे में इनकी कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए। इसके अलावा सोशल मीडिया पर हो रही धोखाधड़ी से महिलाओं को सचेत करने की जरूरत है। यह बात पत्रिका रक्षा कवच अपराधों के विरुद्ध महिला सुरक्षा अभियान के तहत शहर की महिलाओं ने कही।
महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें। भारतीय संविधान में महिलाओं को पर्याप्त अधिकार दिए है। बस उनका उपयोग हमें करना है। हर अन्याय के खिलाफ नारी शक्ति मजबूती से खड़े हो, तो समाज एक नई दिशा और प्रगति की और अग्रसर होगा।
-मोनिका जैन, प्रिय सखी संगठन
स्कूल-कॉलेज आते-जाते समय भी युवतियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इसके लिए युवतियों को सेल्फ डिफेंस के गुर सीखने के साथ ही अपने साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की आवश्यकता है।
-मीरा गोयल, अध्यक्ष रोशनी महिला मंडल
प्रत्येक कॉलोनी और मोहल्ले में ऐसी टीम होनी चाहिए जो महिलाओं की सुरक्षा को लेकर महिला अपराधों पर निगाह रखे। किसी प्रकार का अपराध होने पर टीम समझाइश करे। इससे बात नहीं बने तो पुलिस की मदद लेकर समाधान हो।
-मधु, सचिव रोशनी महिला मंडल
बदलते परिवेश में भारतीय संस्कृति को भुलाया जा रहा है। महिलाओं को अपनी बॉडी लेंग्वेज और मन से दृढ़ होना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो उन्हें कभी तकलीफ नहीं होगी। किसी प्रकार की समस्या होने पर आवाज उठाने की हिम्मत महिला को ही दिखानी होगी।
-अंजलि गंधी, सदस्य