भरतपुर

Rajasthan : रामस्वरूप कोली कैसे बने पहली पसंद, क्या रंजीता पर भारी पड़ी ‘सुर्खियां’? जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी

प्रत्याशी बनाए गए रामस्वरूप कोली वर्ष 2018 में विधानसभा का चुनाव हारने के बाद भी संगठन से जुड़े रहे। रंजीता कोली पूरे पांच साल कार्यकर्ताओं से कनेक्ट नहीं हुईं।

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Mar 03, 2024
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भरतपुर। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने शनिवार को अपने पत्ते खोल दिए। भाजपा ने वर्तमान सांसद रंजीता कोली की टिकट काटकर पूर्व सांसद रामस्वरूप कोली को भरतपुर लोकसभा क्षेत्र से अपना प्रत्याशी बनाया है। रामस्वरूप पिछले कार्यकाल में कबूतरबाजी में फंसे थे। पार्टी ने सीएम की पसंद पर ठप्पा लगाते हुए और संघ का मान रखते हुए रामस्वरूप कोली को टिकट दी है। हालांकि भाजपा ने एक बार फिर ‘कोली’ पर ही दांव खेला है।

प्रत्याशी बनाए गए रामस्वरूप कोली वर्ष 2018 में विधानसभा का चुनाव हारने के बाद भी संगठन से जुड़े रहे। 2007 में कबूतरबाजी में फंसने के कारण इनकी टिकट काट दी गई थी। भाजपा के सूत्रों का दावा है कि रंजीता पूरे पांच साल कार्यकर्ताओं से कनेक्ट नहीं हुईं। इसकी बड़ी वजह उनकी सिक्योरिटी रही। साथ ही उनसे लोग सीधे बात भी नहीं कर सके।

स्थानीय स्तर पर पार्टी उनके खिलाफ काफी विरोध हो रहा था। कार्यकर्ताओं से सीधे संपर्क में नहीं रहना उन पर भारी पड़ा। ऐसे में उनकी दूरी बढ़ती चली गई। कार्यकर्ताओं की यही नाराजगी भाजपा की ओर से लिए गए फीडबैक में सामने आई है। ऐसे में रंजीता की टिकट पर कैंची चल गई।

सिक्योरिटी के बीच उनका ‘खास’ बनना भी उनके लिए घातक रहा। इसको लेकर जनप्रतिनिधियों में भी उनके प्रति नाराजगी देखी गई। रंजीता कोली ने पूर्व में अवैध खनन को लेकर भी खूब शिकायत की थीं। उन्होंने खुद पर हमला होने को लेकर भी खूब सुर्खियां बटोरीं, लेकिन यह उनके पक्ष में नहीं रहा। सुर्खियां बटोरने के बीच वह खुद को बड़ा बनाने के चक्कर में जनता से कटती चली गईं। यह सब पार्टी के फीडबैक में सामने आया है।

भरतपुर से टिकट की दौड़ में बहुतेरे नाम शामिल थे, लेकिन रामस्वरूप कोली के पुराने रसूख उनके काम आए। पूर्व दिग्गज नेताओं ने रामस्वरूप के नाम की वकालत की। टिकट चाहने वालों में मुख्य रूप से शिवानी दायमा, नरेश जाटव, रूप सिंह कैन, दुर्गेश बूटोलिया समेत अन्य नाम शामिल थे, लेकिन कोली सबको पीछे छोडकऱ बाजी मार गए।

रामस्वरूप कोली भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ता बने रहे। कोली जब पहला चुनाव लड़े थे तो उनका चुनावी प्रबंधन वर्तमान सीएम भजनलाल शर्मा ने देखा था। कोली प्रशिक्षित स्वयंसेवक हैं। वह पिछले 15 साल से निर्वासन भोग रहे थे। हालांकि उन्हें वर्ष 2018 में एक बार मौका मिला, लेकिन वह चुनाव हार गए। उन्होंने कभी पार्टी से बगावत नहीं की। कबूतरबाजी में फंसने के बाद उन्हें कोर्ट से राहत मिली।

-उम्र: 54 वर्ष

-शिक्षा: 12वीं पास

-आपराधिक रेकॉर्ड: वर्ष 2007 में कबूतरबाजी के मामले में फंसे।

-कितनी बार सांसद-विधायक रहे: 2004 में बयाना से सांसद, तीन बार वार्ड पार्षद

-संगठन में किन पदों पर रहे: भाजपा एससी मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष, मानव संसाधन विकास समिति के सदस्य

Published on:
03 Mar 2024 02:59 pm