-कच्चा परकोटा नियमन संघर्ष समिति का मामला, पट्टे देने की कर रहे मांग
कच्चा परकोटा नियमन संघर्ष समिति की ओर से पट्टे देने की मांग को लेकर गुरुवार को हुए तिरंगा न्याय यात्रा के जयपुर कूच को पुलिस ने दौसा जिले के महुआ में रोक दिया। इसको लेकर पुलिस व यात्रियों के बीच जमकर विवाद हुआ। स्थिति धक्का-मुक्की तक जा पहुंची।
तिरंगा न्याय यात्रा को प्रारम्भ करने से पूर्व पं. रामकिशन ने राष्ट्रीय ध्वज फहरा कर यात्रा को रवाना किया। तिरंगा न्याय यात्रा का नेतृत्व संघर्ष समिति के संयोजक जगराम धाकड़ को सौंपा गया। पूर्व नेता प्रतिपक्ष इन्द्रजीत भारद्वाज भूरा ने कहा कि राज्य सरकार को गरीब मजदूर तबके के लोगों की वर्षों से चली आ रही पट्टे देने मांग को पूरा करने के लिए सार्थक प्रयास करने चाहिए। जब आधे कच्चे परकोटे वालों को पट्टे दे दिए गए हैं तो शेष बचे लोगों को भी पट्टे भी दिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि कच्चे डंडे पर गरीब मजदूर, दलित, अल्पसंख्यक एवं अल्प आय वर्ग के लोग वर्षों से रहते आ रहे हैं। इनके साथ सौतेला व्यवहार नहीं होना चाहिए। शुक्रवार दोपहर जब यात्रा दौसा जिले की सीमा में पहुंची तो महुआ पुलिस ने उन्हें रोक दिया। जहां एक एसआई ने आंदोलनकारियों के साथ अभद्रता कर थाने में बंद करने की धमकी दे डाली। विवाद बढ़ता देखकर सीआई जीतेन्द्र सिंह मौके पर पहुंचे और मामले को शांत कराया। महुआ पुलिस का कहना था कि आदेश है कि इस तिरंगा न्याय यात्रा को आगे नहीं बढने दिया जाए। यात्रियों से स्वीकृति पत्र दिखाने को भी कहा। कच्चा परकोटा के लोग सडक़ किनारे ही फर्श बिछाकर बैठ गए। महुआ पुलिस ने भरतपुर मथुरा गेट थाने से पुलिस को बुलाकर वार्ता कराई, लेकिन उसका कोई समाधान नहीं निकला। इतने में ही भरतपुर से और भी लोग बस से वहां पहुंच गए। अब शनिवार सुबह वार्ता कराने के बाद मुख्यमंत्री से 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात कराने पर सहमति बन सकती है। हालांकि शुक्रवार देर रात तक कोई हल नहीं निकला है।