कहीं अधूरी, कहीं टूटी पड़ी है चारदीवारी

कहीं शिक्षक नहीं तो कहीं कक्षा-कक्षों अपर्याप्त हैं। कहीं बिजली नहीं तो कहीं पीने के पानी का संकट नासूर बना है। कुछ ऐसे ही हाल हैं प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों के।
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Jul 25, 2017
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कहीं शिक्षक नहीं तो कहीं कक्षा-कक्षों अपर्याप्त हैं। कहीं बिजली नहीं तो कहीं पीने के पानी का संकट नासूर बना है। कुछ ऐसे ही हाल हैं प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों के।

जिले में एक चौथाई स्कूलों में तो अभी तक चारदीवारी का ही निर्माण नहीं हो सका है। जिन स्कूलों में चारदीवारी का निर्माण हो गया, उनमें से अनेक स्कूलों में जगह-जगह से चारदीवारी टूटकर गिर चुकी है या फिर क्षतिग्रस्त हो चुकी है।

इस कारण ऐसे कई स्कूलों में गाय, भैंस अन्य पशुओं के साथ ही श्वान व सुअर तक विचरण करते रहते हैं। चारदीवारी से वंचित 3 सौ स्कूलों में से कई ऐसे भी हैं, जिनमें ग्रामीणों ने ईंधन आदि डालकर अस्थाई अतिक्रमण कर रखा है।


प्रयासों को नहीं मिली मंजिल

राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक स्कूल, गोपालगढ़ (भरतपुर): शहर में संचालित इस स्कूल में चारदीवारी नहीं है। स्कूल के पीछे की तरफ पानी भरा रहता है। इस कारण हमेशा यह डर बना रहता है कि कहीं कोई बालक उधर जाकर पानी में नहीं गिर जाए। स्कूल की चारदीवारी बनवाने के लिए कई बार प्रयास भी हुए, लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी। हालांकि भामाशाह की तलाश कर चारदीवारी का निर्माण कराने की दिशा में भी प्रयास चल रहे हैं।

कहीं हो न जाए हादसा

हलैना. राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, नसवारा का आधा हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग की सीमा में है। हाई-वे पर दिन-रात वाहनों का संचालन रहता है। स्कूल समय में कभी कोई हादसा घटा तो बच्चों के लिए खतरा हो सकता है। यह दुर्घटना चिह्नित प्वाइंट भी है। स्कूल में 81 विद्यार्थी हैं। स्कूल के पिछवाड़े गहरी पोखर है। चारदीवारी के बिना पोखर भी हादसे का कारण बन सकती है।

पत्र लिखे पर नहीं हटे कब्जे


पहाड़ी. राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, जसौती के एक तरफ की चारदीवारी अधूरी है। तीन तरफ है ही नहीं। इस कारण खेल मैदान के साथ अन्य जगह में लोगों ने ईंधन डाल रखा है। अस्थायी व स्थायी अतिक्रमण भी हैं। स्कूल परिसर में ही एक तरफ मंदिर भी बना है। संस्था प्रधान मानसिंह बताते हैं कि उच्चाधिकारियों को पत्र लिखने के बाद भी अतिक्रमण नहीं हट सके हैं।

-हां, कई स्कूलों में चारदीवारी टूट चुकी है। बजट नहीं होने के कारण 300 स्कूलों में चारदीवारी का निर्माण नहीं हो सका है। हालांकि अब मात्र 18 स्कूलों में चारदीवारी निर्माण के लिए मनरेगा से प्रस्ताव मंजूर हो गए हैं।
मुंशी खान, एडीपीसी, एसएसए, भरतपुर

Published on:
25 Jul 2017 11:44 am
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