
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo- IANS)
Trump statement on the Strait of Hormuz: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एकबार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बड़ा बयान दिया है। इससे दुनिया भर में हलचल मच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान को हराने के बाद वे इस जलमार्ग को अमेरिका का क्षेत्र घोषित कर देंगे। हालांकि यह कैसे संभव होगा और इसका कानूनी आधार क्या होगा, इस पर उन्होंने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना पूरी तरह खत्म हो चुकी है और उसके 159 जहाज समुद्र में डूब चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि ईरान के सभी 212 लड़ाकू विमान भी मार गिराए जा चुके हैं। इनमें से कई विमान पहले अमेरिका से ही खरीदे गए थे, जिसका जिक्र करते हुए उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर तंज भी कसा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि ईरान का शीर्ष नेतृत्व लगभग खत्म हो चुका है, जिसकी वजह से बातचीत की राह मुश्किल हो गई है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास अब बातचीत के लिए कोई ठोस नेतृत्व ही नहीं बचा है। यही उनके लिए एक समस्या बन गई है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि ईरान के पास अब भी कुछ मिसाइलें और ड्रोन मौजूद हैं, भले ही उन्हें बनाने की क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है।
ट्रंप ने अमेरिका की सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए यह कदम जरूरी था। ट्रंप ने कहा कि मेरे कार्यकाला में अमेरिकी सेना मजबूत हुई है। अब उसका इस्तेमाल भी किया, भले ही जितना सोचा था उससे थोड़ा ज्यादा करना पड़ा।
गौर करने वाली बात यह है कि ट्रंप ने यह बात न्यूयॉर्क के गार्डन सिटी में अपराध और कानून व्यवस्था पर आयोजित एक कार्यक्रम में कही। भाषण का विषय कुछ और था, मगर बीच में उन्होंने ईरान युद्ध का जिक्र छेड़ दिया और सीधे इस जलमार्ग पर दावा ठोक दिया। उन्होंने कहा कि ईरान को हराने के बाद जल्द ही वे होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र बना देंगे।
पूर्व अमेरिकी राजदूत और व्हाइट हाउस के मध्य-पूर्व नीति सलाहकार गिन्सबर्ग ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के पास इस टकराव को खत्म करने की कोई स्पष्ट योजना नजर नहीं आती। उन्होंने कहा कि इस मामले में अंत कैसे होगा, इसकी कोई तस्वीर साफ नहीं है और राष्ट्रपति की आगे की रणनीति को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। उन्होंने इसे एक लंबी खिंचने वाली मुहिम बताया, जिसमें बस डटे रहने की कोशिश की जा रही है।
स्टिमसन सेंटर में नेशनल सिक्योरिटी रिफॉर्म प्रोग्राम के डायरेक्टर डैन ग्रेजियर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलवाने के लिए अमेरिका जिस बढ़े हुए आर्थिक दबाव की धमकी दे रहा है, ईरान उसे झेलने में सक्षम है। उन्होंने अपने दावे की पुष्टि को लेकर कहा कि ईरान 1979 से ही एक अलग-थलग पड़ा देश रहा है और वर्षों से तमाम तरह के प्रतिबंध झेलता आ रहा है। उन्होंने कहा कि यह सोचना दिलचस्प है कि जो नतीजा छह महीने की सैन्य कार्रवाई से हासिल नहीं हो पाया, वह अब आर्थिक दबाव के जरिए मिल जाएगा
ग्रेजियर ने कहा कि अमेरिका का आर्थिक दबाव की तरफ बढ़ता झुकाव दरअसल अमेरिकी सेना के पास घटते जा रहे गोला-बारूद के भंडार की वजह से है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना के पास लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों की कमी हो चुकी है, जो दूर से लड़े जाने वाले युद्ध के लिए बेहद जरूरी होते हैं और अमेरिका अब तक इसी रणनीति के सहारे इस मुहिम को चला रहा था।
Updated on:
15 Aug 2026 09:28 am
Published on:
15 Aug 2026 09:28 am
