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सर्किट हाउस विवाद: देर रात को महुआ मोइत्रा को कमरा खाली करने का फरमान, विपक्ष ने जताया कड़ा ऐतराज

टीएमसी सांसद Mahua Moitra को देर रात को कृष्णनगर सर्किट हाउस से बाहर निकालने के प्रयास पर सियासी बवाल। विपक्ष ने इसे विशेषाधिकार का हनन और महिला गरिमा का अपमान बताया है। जानें पूरी खबर।
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तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा। (Photo- ANI)

Mahua Moitra Circuit House Controversy: पश्चिम बंगाल के कृष्णनगर में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को देर रात सर्किट हाउस से बाहर निकलने के फरमान ने एक बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। सांसद ने आरोप लगाया है कि जिला प्रशासन ने उन पर दबाव डालते हुए रात को कमरा खाली करने को कहा, जबकि बाहर जमा हुई भीड़ 'जय श्री राम' के नारे लगा रही थी। इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने सरकार और प्रशासन के रवैये पर सवाल खड़े करते हुए इसे सांसद के अधिकारों का हनन बताया है।

प्रशासन का दबाव और सांसद का पलटवार

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के अनुसार, वह शाम करीब 6:30 बजे कृष्णनगर सर्किट हाउस पहुंची थीं, जहां उन्हें वही कमरा आवंटित किया गया था जिसमें वह आमतौर पर ठहरती हैं। रात 9:20 बजे उनके कमरे में भोजन परोसा गया, लेकिन इसके कुछ ही देर बाद रात 9:47 बजे उन्हें प्रशासन की ओर से कमरा खाली करने का फोन आया। दबाव यहीं नहीं रुका, रात 10:52 बजे उन्हें इसी संदर्भ में एक लिखित संदेश भी भेजा गया। एक निर्वाचित महिला सांसद होने के नाते अतिरिक्त जिलाधिकारी द्वारा इस तरह का निर्देश मिलने पर उन्होंने गहरी हैरानी जताई और कहा कि जिला प्रशासन उन्हें और अन्य विपक्षी नेताओं को इलाके से बाहर रखने के लिए बेताब है।

प्रशासन के इस निर्देश पर मोइत्रा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कमरा खाली करने से साफ इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट की एक पुरानी टिप्पणी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने उन्हें गोलियों का सामना करने को कहा था, इसलिए वह किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाली नहीं हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को टैग करते हुए सांसद ने स्पष्ट किया कि वह साल 2029 तक चुनी हुई सांसद हैं और संसद का सत्र महज एक दिन पहले ही समाप्त हुआ है।

विपक्ष ने सरकार को घेरा, विशेषाधिकार हनन का उठाया मुद्दा

इस पूरे घटनाक्रम के सामने आते ही अन्य विपक्षी नेताओं ने भी तीखी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मामले में सीधे तौर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने सोशल मीडिया 'एक्स' के जरिए सवाल पूछा है कि क्या एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ किया गया यह व्यवहार सांसद के विशेषाधिकार का उल्लंघन नहीं है।

वहीं, टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने भी इस घटना को लेकर सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि एक तरफ एक महिला सांसद को देर रात को सरकारी आवास से बाहर निकालने का आदेश दिया जाता है और अगले ही दिन भाजपा के नेता महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे करेंगे। बनर्जी ने कड़े शब्दों में कहा कि जो सरकार एक महिला के आत्मसम्मान और गरिमा को भी राजनीति का हिस्सा बना दे, वह असल में उस महिला को अपमानित नहीं करती, बल्कि अपना ही कद छोटा करती है।

TMC की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने एक्स पर लिखा, 'शर्मनाक। एक निर्वाचित महिला सांसद को रात में उनके ही निर्वाचन क्षेत्र में सरकारी आवास खाली करने का आदेश दिया जाता है। क्या @BJP4India इसी तरह बंगाल पर शासन करना चाहती है? श्रीमती @MahuaMoitra को अपने निर्वाचन क्षेत्र में रहने का पूरा अधिकार है। बंगाल वहां के लोगों का है, भाजपा का नहीं।'