Bhilai News: शुरुआती आकलन में सबसे बड़ी वजह जागरूकता की कमी, समय पर दवा का सेवन न करना, साथ ही शराब और धूम्रपान जैसी आदतें सामने आ रही हैं
Bhilai News: अब्दुल सलाम. भिलाई में वर्ष 2024-25 के दौरान क्षय रोग (टीबी) से करीब 100 मरीजों की मौत हुई है। अब स्वास्थ्य विभाग इन मौतों के कारणों को स्पष्ट करने के लिए टीबी डेथ ऑडिट कर रहा है। शुरुआती आकलन में सबसे बड़ी वजह जागरूकता की कमी, समय पर दवा का सेवन न करना, साथ ही शराब और धूम्रपान जैसी आदतें सामने आ रही हैं। केंद्र सरकार के टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए केवल कागजी कार्यवाही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस क्रियान्वयन की जरूरत बताई जा रही है।
डेथ ऑडिट के दौरान यह तथ्य उभरकर सामने आया है कि कई मामलों में टीबी मरीजों की पहचान देर से हुई। शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेने और समय पर जांच न होने के कारण बीमारी गंभीर अवस्था में पहुंच गई। स्वास्थ्य विभाग के पास दवा लेने के बाद मरीज का डाटा उपलब्ध होने के बावजूद यह सवाल उठ रहा है कि इलाज के दौरान मरीजों की मौत क्यों हो रही है।
बलगम जांच के लिए भेजे जाने वाले सैंपल की गुणवत्ता सुधारी जाए।
टीबी दवाओं की निरंतर और समय पर उपलब्धता सुनिश्चित हो।
मरीजों और परिजनों की काउंसलिंग व जागरूकता बढ़ाई जाए, ताकि वे इलाज अधूरा न छोड़ें।
जांच प्रणाली बदली, लेकिन चुनौतियां बरकरार
टीबी की पारंपरिक माइक्रोस्कोपी (बलगम जांच) अब बंद कर दी गई है। इसकी जगह सीबी-नैट मशीन से जांच की जा रही है, जिसमें स्पूटम के जरिए बैक्टीरिया लोड की पहचान होती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार बलगम की गुणवत्ता खराब होने से रिपोर्ट प्रभावित हो जाती है। इसका असर जांच पर पड़ता है। मरीज को दवाइयों का सही लाभ नहीं मिल पाता।
शासन ने बलगम जांच के लिए मरीजों से सैंपल लाने-ले जाने के लिए रनर सिस्टम लागू किया है, लेकिन प्रति किलोमीटर चार रुपए भुगतान की व्यवस्था बजट अभाव में प्रभावी नहीं हो पा रही। जिले में पाटन, झीट, सेक्टर-9, शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सुपेला, धमधा और निकुम में सीबी-नैट मशीनें स्थापित हैं।
ऑडिट में यह भी देखा जा रहा है कि-
मरीज ने दवा पूरी अवधि तक ली या बीच में छोड़ दी
दवा समय पर मरीज तक पहुंची या नहीं
दवा पहुंचाने वाला रनर सक्रिय था या नहीं
दवाओं का शरीर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं पड़ा
हर एक मौत की अलग-अलग जांच की जा रही है, ताकि यह
स्पष्ट हो सके कि इलाज के बावजूद जान क्यों गई।