कोई भी छात्र परीक्षा से वंचित न हो इसलिए नोडल सेंटर के निर्देश पर वीक्षकों ने घर पर फोनकर उनका मूल पहचान पत्र अपने वॉट्सएप पर मंगवाया।
भिलाई. छत्तीसगढ़ व्यापमं के निर्देशों के बावजूद गुरुवार को प्री-पॉलीटेक्निक टेस्ट (पीपीटी) की परीक्षा में सैकड़ों छात्र बिना मूल पहचान पत्र के पहुंच गए। छात्रों के पास न तो आधार कार्ड था और न ही कोई अन्य पहचान दस्तावेज। दुर्ग जिले में इस परीक्षा के लिए व्यापमं ने १२ केंद्र बनाए थे, जिनमें ५०९५ छात्र शामिल हुए। जबकि ६३६ छात्र परीक्षा देने नहीं पहुंचे। कोई भी छात्र परीक्षा देने से वंचित न हो जाए इसलिए नोडल सेंटर(साइंस कॉलेज) के निर्देश पर वीक्षकों ने छात्रों के घर पर फोनकर उनका मूल पहचान पत्र अपने वॉट्सएप नंबर पर मंगवाया।
सही निर्णय लेकर दस्तावेज मोबाइल पर मंगवाए
हर एक केंद्र में इस तरह के मामले सामने आए। अधिकतर छात्र बार-बार निर्देशों के बाद भी आधार कार्ड की फोटो कॉपी लेकर पहुंचे थे, जिसे व्यापमं के निर्देशों के तहत स्वीकार नहीं किया जा सकता था। छात्र का साल बचाने वीक्षकों और नोडल सेंटर ने सही निर्णय लेकर इनके दस्तावेज अपने मोबाइल पर मंगवाए। ऐसे छात्रों की विस्तृत जानकारी भी ली गई।
प्रदेश में 21870 ने दी परीक्षा
इस साल प्रदेश के ८१ केंद्रों में २१८७० विद्यार्थियों ने पीपीटी की परीक्षा दी है। यह संख्या पिछले साल की तुलना में १३ फीसदी कम है। अपने जिले में कुल संख्या का १२ फीसदी छात्र परीक्षा में शामिल हुए। एक्सपर्ट आदित्य ताम्रकार ने बताया कि पीपीटा का पर्चा १२वीं के छात्रों के लिए तो आसान रहा, लेकिन १०वीं के छात्रों को इसे हल करने में पसीने छूटे। प्री-पालीटेक्निक का पर्चा होने की वजह से इसमें १०वीं के स्तर के सवाल पूछे जाने चाहिए थे, लेकिन गणित के प्रश्न १२वीं के स्तर के थे। इसी तरह अन्य विषयों ने भी १०वीं के छात्रों को परेशान किया।
कोई भी छात्र वंचित नहीं हुआ
डॉ. ओपी गुप्ता, दुर्ग समन्वयक, व्यापमं ने बताया कि पीपीटी की परीक्षा में कई छात्र मूल पहचान पत्र नहीं लाए थे, वीक्षकों ने उनके घर फोन कर मूल दस्तावेज की कॉपी वॉट्सएप पर मंगवाई। कोई भी छात्र वंचित नहीं हुआ। आगे की परीक्षाओं में छात्रों को चाहिए कि वे पहचान पत्र साथ लेकर ही आएं।