नगरीय निकायों की वजह से अटका पड़ा है। इसकी वजह से साढ़े 6 हजार से अधिक रहवासी पिछले कई सालों से दोहरे टैक्स की मार झेल रहे हैं।
भिलाई. गृह निर्माण मंडल की करीब सात कॉलोनियों का हस्तांतरण नगरीय निकायों की वजह से अटका पड़ा है। इसकी वजह से साढ़े 6 हजार से अधिक रहवासी पिछले कई सालों से दोहरे टैक्स की मार झेल रहे हैं। हद तो यह है कि सरकार की तरफ से चार बार निकायों को हस्तांतरण प्रक्रिया के लिए सर्वे रिपोर्ट बनाने के निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन सभी निकाय इससे कतरा रहे हैं।
दुर्ग, भिलाई और चरोदा निगम के अधिकारियों की मानें तो गृह निर्माण मंडल के कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। कॉलोनियों को हैंड ओवर लेने के बाद सड़क, नाली, पाइप लाइन और पानी सरीखी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने का जिम्मा निगम प्रशासन का होगा। माना जा रहा है इन्हीं समस्याओं को देखते हुए निगम प्रशासन कॉलोनियों को हैंड ओवर लेने में टालमटोल कर
रहा है।
पांचवी बार लिखा पत्र
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के निकायों को कॉलोनियों की वास्तविक स्थिति की जानकारी के लिए २१ जून को पांचवी बार पत्र लिखा है। जिसमें उसने लिखा है कि गृह निर्माण मंडल के कॉलोनियों को निगम को हस्तांतरित किया जाना है। इस संबंध में कॉलोनियों की वास्तविक स्थिति की जानकारी मंगाई है। जानकारी अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। यह अत्यंत खेद जनक है। इससे पहले संचालक चार बार १८ नवंबर २०१७, २८ नवंबर,२१ दिसंबर, २४ जनवरी २०१८ को पत्र लिख चुका है।
इसलिए मांगी रिपोर्ट
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाओं की समस्या के अनुसार निकायों को फंड देगा। इसके लिए नगर पालिक निगम और छत्तीसगढ़ राज्य गृह निर्माण मंडल के इंजीनियर्स को सयुंक्त दौरा कर कॉलोनियों में सड़कों की स्थिति, सीवरेज लाइन, पानी की सप्लाई, प्रकाश व्यवस्था और उद्यानों की स्थिति का भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट मांगी है। ताकि कॉलोनियों को निकायों का हैंडओवर और मेंटनेंस के लिए फंड दिया जा सके। लोगों की समस्याओं का निराकरण किया जा सके।
फायदा
कॉलोनियों के रहवासियों से जलकर के रूप में रेवेन्यू मिलेगा। इससे निगम का राजस्व बढ़ेगा।
आवासीय क्षेत्र का विस्तार होने पर शासन से मूलभूत सुविधाएं के लिए बड़ा फंड मिलेगा।
नुकसान
निगम का खर्च बढ़ जाएगा। सफाई, पानी, बिजली की सुविधाएं निगम को देना पड़ेगा।जमीन का मालिक गृह निर्माण मंडल ही रहेगा। जमीन और आवास की खरीदी बिक्री का अधिकार निगम को नहीं मिलेगा।
फायदा
टैक्स से राहत मिलेगी। निगम को संपत्तिकर, यूजर चार्ज देते हैं। मंडल को मेंटनेस का २०० रु.देते हैं।
जलकर में १०० रु. बचत होगी। मंडल ३०० रु. जलकर वसूलता है। निगम २०० रु. प्रतिमाह है।
नुकसान
कॉलोनी हैंड ओवर होने के बाद रहवासियों कोई नुकसान नहीं है। टैक्स देने के बावजूद पानी सप्लाई की प्रॉपर सुविधाएं नहीं मिल रही है। हैंडओवर के बाद निगम और गृह निर्माण के बीच चल रहे विवाद समाप्त हो जाएगा।
कॉलेानियों की ये प्रमुख समस्याएं
तालपुरी कॉलोनी में पानी की सप्लाई और सीवेरेज ट्रीटमेंट की समस्या है। इसको लेकर अलाटियों ने गृह निर्माण के खिलाफ शासन स्तर पर शिकायत की है। इसके अलावा पानी के बिल को लेकर भी गृह निर्माण मंडल और निगम के बीच विवाद चल रहा है।
तालपुरी में पानी सप्लाई के लिए गृह निर्माण मंडल ने २०१४ में बल्क कनेक्शन लिया है। इसके एवज में निगम को लगभग ४ करोड़ रुपए दिया जाना था। गृह निर्माण मंडल ने लोगों से चार्ज वसूल कर निगम में दो करोड़ से अधिक राशि जमा कर दिया है। बाकी राशि के लिए निगम डिमांड नोटिस भेजता है।
चरोदा, कोहका, कुरुद, बघेरा, चिखली गृह निर्माण मंडल की कॉलोनियों में पानी सप्लाई और सीवरेज की सबसे बड़ी समस्या है। चरोदा, कोहका, कुरुद और बघेरा के आवासों के मेंटनेंस पर ध्यान नहीं दिया। कॉलोनियों की सड़कें खराब हो गई हैं। सीवरेज लाइन जाम है। शिकायत के बावजूद अधिकारी कॉलोनियों में देखने तक नहीं जाते।लोगों की शिकायत पर सुनवाई भी नहीं होती।
नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ एवं कॉलोनाइजर एक्ट के अनुसार तीन साल के अंदर निगम क्षेत्र में निर्मित कॉलोनियों को हैंडओवर करने का प्रावधान है। यानी एक्ट के अनुसार कोई भी कॉलोनाइजर/गृह निर्माण मंडल कॉलोनी को निगम प्रशासन को हैंडओवर करना चाहता है तो निगम इनकार नहीं कर सकता। निगम प्रशासन को कॉलोनियों में तमाम सुविधाएं देने का अधिकार और कर्तव्य है।
महापौर देवेंद्र यादव ने बताया कि आयुक्त और गृह निर्माण मंडल के ईई को सयुंक्त टीम बनाकर कॉलोनियों को सर्वे कराने निर्देशित किया था। शासन को रिपोर्ट देने कहा था। इसके बावजूद भी नहीं दी रिपोर्ट। ईई गृह निर्माण मंडल आरके गरहवार ने बताया कि तालपुरी कॉलोनी को निगम भिलाई और खारून ग्रीन्स को कुम्हारी को हैंडओवर के लिए फाइल आगे बढ़ा दी है।
बाकी कॉलोनियों का सर्वे रिपोर्ट के साथ फाइल तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। अध्यक्ष तालपुरी रेसीडेंट एसोसिएशन सुनील चौरसिया ने बताया कि २०१३ से लगातार कॉलोनी को निगम में हैंडओवर की मांग कर रहे हैं। मंत्री से लेकर महापौर और अधिकारियों को ज्ञापन भी दिए हैं। इसके बावजूद निगम टालमटोल कर रही है।