Bhilai Nagar Nigam: सदन के प्रस्ताव के बाद अब भिलाई निगम आयुक्त राजीव कुमार पांडेय को हटाने की मांग तेज हो गई है। सभापति ने कलेक्टर को पत्र खिलकर कर कार्रवाई की मांग की है…
Bhilai Nagar Nigam: नगर निगम भिलाई के आयुक्त राजीव कुमार पांडेय को पद से हटाने या स्थानांतरित करने की मांग अब औपचारिक रूप ले चुकी है। निगम के सभापति गिरवर बंटी साहू ने दुर्ग कलेक्टर को पत्र लिखकर सदन में पारित प्रस्ताव के अनुरूप कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने पत्र में छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 54(2) के तहत की गई कार्रवाई की जानकारी भी दी है।
पार्षदों ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व की सामान्य सभा के फैसलों की अनदेखी की गई और मांगी गई जानकारी पर संतोषजनक जवाब नहीं दिए गए, जिससे प्रशासनिक गतिरोध की स्थिति बनी।
25 मार्च को हुई बजट बैठक में पार्षदों ने आयुक्त की कार्यप्रणाली और वित्तीय अनियमितताओं पर कड़ी आपत्ति जताई। आरोप है कि विभिन्न मदों से प्राप्त राशि को बिना सक्षम स्वीकृति अन्य मदों में खर्च किया गया, जो वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन है।
सभापति गिरवर बंटी साहू ने बताया कि उत्पन्न परिस्थितियों और प्रशासनिक गतिरोध को देखते हुए पार्षद पीयूष मिश्रा ने छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 54(2) के तहत आयुक्त को पद से हटाने का प्रस्ताव सदन में प्रस्तुत किया। इस प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी पार्षदों ने एकमत से समर्थन किया, जिसके बाद प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो गया। सभापति ने दुर्ग कलेक्टर को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि सदन की भावना और पारित प्रस्ताव के अनुरूप आयुक्त के स्थानांतरण अथवा पद से हटाने की आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
भाजपा पार्षद पीयूष मिश्रा ने आरोप लगाया कि 25 मार्च को आयुक्त ने करीब दो करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। इसमें एक ऐसी एजेंसी को भी भुगतान शामिल है, जिसने पीएफ जमा नहीं किया था। आरोप है कि उस एजेंसी के पीएफ मद में निगम से लगभग 40 लाख रुपए का भुगतान किया गया, जिसकी जांच आवश्यक है। साथ ही, एक ही दिन में किए गए भुगतान और हस्ताक्षरों की संख्या पर भी सवाल उठाए गए हैं।
सभापति ने पत्र में उल्लेख किया है कि कई निविदाएं बिना वैधानिक प्रक्रिया और सक्षम स्वीकृति के जारी की गईं। संजय नगर तालाब के पास स्थित भूमि के लिए बिना सामान्य सभा और राज्य शासन की अनुमति के ई-निविदा आमंत्रित करने का मामला भी उठाया गया। इसके अलावा, भूखंडों की नीलामी से प्राप्त करोड़ों रुपए कथित रूप से शासन के दिशा-निर्देशों के विपरीत ठेकेदारों को भुगतान किए जाने की बात भी सामने आई है।
निगम सदन द्वारा पारित प्रस्ताव राज्य शासन के लिए बाध्यकारी नहीं है। आयुक्त को हटाने या स्थानांतरित करने का अंतिम निर्णय राज्य सरकार के विवेक पर निर्भर करेगा।
नगर निगम, भिलाई ने जिन कर्मियों व एजेंसी को भुगतान किया है, वह नियमानुसार है।
- तिलेश्वर साहू, अधिकारी, जनसंपर्क विभाग, नगर निगम, भिलाई,