भिलाई

मिनी इंडिया, यहां स्वाद और संस्कृति की पकती है अनूठी खिचड़ी, आप भी जाने इसका राज

मिनी इंडिया भिलाई में हर प्रांतवासी खिचड़ी बनाते हैं, पर सबके बनाने का तरीका भी अलग है और स्वाद भी। पर खिचड़ी सभी को भाती है।

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Nov 03, 2017

भिलाई. मां दुर्गा का भोग तो कहीं वैंकटेश्वर स्वामी को लगाया जाने वाला महाभोग है खिचड़ी। कभी मकर संक्रांति पर दान के लिए तो कभी ग्रह दोष दूर करने खिचड़ी का अलग ही महत्व है। मिनी इंडिया भिलाई में हर प्रांतवासी खिचड़ी बनाते हैं, पर सबके बनाने का तरीका भी अलग है और स्वाद भी। पर खिचड़ी सभी को भाती है। सेहत के लिए भी बेस्ट मानी जाने वाली खिचड़ी को लेकर देशभर में अलग-अलग मान्यताएं हैं।

इन दिनों दिल्ली में चल रहे इंटरनेशनल फूड फेस्टिवल में खिचड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। पत्रिका ने जब ' खिचड़ी के बारे में लोगों से चर्चा की तो खिचड़ी के भी कई रोचक किस्से सामने आए।मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान श्रेष्ठ माना जाता है, लेकिन जब खाने की बारी आती है तो खिचड़ी दो अलग स्वादों में बंट जाती है।

मराठी सोमवार को नहीं बनाते खिचड़ी
मरोदा सेक्टर निवासी रश्मि घाटे ने बताया कि महाराष्ट्रीयन घरों में सोमवार को खिचड़ी नहीं बनाई जाती। जबकि संक्रांति पर पुनेरी खिचड़ी जो चावल, मूंगदाल और नारियल को मिलाकर बनाई जाती है। वह अनिवार्य होती है। इसके साथ ही कच्ची खिचड़ी भी छोटी मटकियों में भरकर वान के रूप में दी जाती है।

गहौई वैश्य समाज का प्रिय भोजन खिचड़ी
गहौई वैश्य समाज की संगीता सिजारिया बताती हैं कि उनके यहां खिचड़ी में हिंग और मिर्च का तड़का जरूरी है। खासकर ठंड के दिनों में खिचड़ी का प्रयोग ज्यादा किया जाता है, लेकिन खिचड़ी को बिना घी के नहीं खाया जाता। वे बताती हैं कि मकर संक्रांति पर भी खिचड़ी दान करने की परंपरा उनके समाज में है। उनके घर में सप्ताह में एक दिन खिचड़ी जरूर बनती है।

बिहार में सिर्फ शनिवार को खिचड़ी खाने की परंपरा
बिहार में शनिवार को ही खिचड़ी खाना अच्छा माना जाता है। अवधपुरी निवासी पूनम प्रियदर्शी बताती हैं कि इसके पीछे मान्यता यह है कि शनिदेव की कृपा बनी रहती है और ग्रह दोष भी दूर होते हैं। उनके यहां खिचड़ी में मूंग दाल के अलावा चना, मसूर भी मिक्स किया जाता है। खिचड़ी का स्वाद बढ़ाने घी के साथ इसे आलू का चोखा और पापड़ के साथ ही परोसा जाता है ताकि यह और भी स्वादिष्ट हो जाए।

गढ़वाल में प्रसव के बाद पांच दिनों तक खिलाते हैं खिचड़ी
गढ़वाल से जुड़ी नीता गरेवाल के अनुसार उनके यहां डिलवरी होने के बाद लगातार पांच दिनों तक महिला को सिर्फ खिचड़ी ही दी जाती है। जिसमें मूंग दाल, दलिया और सब्जियों को मिक्स कर तीन तरह की अलग-अलग खिचड़ी तैयार की जाती है। वहीं मकर संक्रांति पर बनने वाली खिचड़ी को मटके में ही पकाना होता है। जिसमें अदरक और लहसून को कूटकर डाला जाता है।

खिचड़ी के बिना नहीं होती बंगालियों की पूजा
बंगाल की रुमा कर ने बताया कि दुर्गा, काली और लक्ष्मी पूजा में खिचड़ी का ही भोग लगाया जाता है। वहीं बारिश में जहां चावल और मसूर दाल की खिचड़ी बनाई जाती है। ठंड में चावल के साथ भूंजी हुई बिना छिलके वाली मूंगदाल और अदरक को मिलाकर बनाई गई खिचड़ी खाई जाती है। खिचड़ी के साथ बैगन भाजा, टमाटर की खट्टी-मीठी चटनी भी इसका स्वाद बढ़ा देती हैं। वे बताती हैं कि बंगाली खिचड़ी का स्वाद कुछ अलग ही होता है।

आंध्रा में 12 महीने बनती है खिचड़ी
मैत्रीकुंज निवासी एवं आंध्र समाज की पी पद्मा ने कहा कि उनके यहां 12 महीने रोजाना खिचड़ी बनती है, क्योंकि सुबह वेंकटेश्वर स्वामी (कृष्ण) को खिचड़ी महाभोग के रूप में लगाई जाती है। इसलिए वे रोजाना खिचड़ी तैयार करती हंै। उनके यहां हर शुभ कार्य में खिचड़ी को शामिल किया जाता है और इसमें सिर्फ चावल, मूंगदाल, नमक और हल्दी के साथ घी डालकर ही पकाया जाता है।

कता का संदेश देती है गुजराती खिचड़ा
गुजराती समाज में खिचड़ी और खिचड़ा एकता और भाईचारे का संदेश देती है। वैशालीनगर निवासी दिव्या जानी ने बताया कि गोवर्धन पूजा के दिन होने वाले अन्नकूट, रामदेव पीर की जयंती में खिचड़ा और श्रीजलाराम जयंती में खिचड़ी का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

उन्होंने बताया कि सिर्फ चावल और दाल से बनी खिचड़ी कहलाती है, जबकि चावल सहित सभी तरह की दाल, गेंहू, जैसे करीब पांच, सात या ग्यारह तरह की वस्तुओं को मिलाकर खिचड़ा बनता है। उन्होंने बताया कि हल्का और सुपाच्य होने के कारण पाटीदार, कच्छ गुर्जर क्षत्रिय गुजराती समाज के घरों में रात के भोजन में खिचड़ी शामिल होती है।

Published on:
03 Nov 2017 10:51 am
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