घर की छत पर निजी दूरसंचार कंपनियों का मोबाइल टावर लगाने के नाम पर 62 लाख रुपए की ठगी करने वाला गिरोह पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। अलग-अलग राज्यों से पुलिस सात आरोपियों को गिरफ्तार करके भिलाई लाई है। (Bhilai News)
भिलाई. घर की छत पर निजी दूरसंचार कंपनियों का मोबाइल टावर लगाने के नाम पर 62 लाख रुपए की ठगी करने वाला गिरोह पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। अलग-अलग राज्यों से पुलिस सात आरोपियों को गिरफ्तार करके भिलाई लाई है। इस मामले में मंगलवार दोपहर को एसएसपी अजय यादव खुलासा करेंगे। साथ आरोपियों के गिरोह को बेनकाब करेंगे। ठगी करने वाले गिरोह की महिला सदस्य अभी फरार है। वहीं एक आरोपी को लगभग 15 दिन पहले पुलिस (Bhilai Police) ने लखनऊ से गिरफ्तार किया था। पिछले एक महीने से पुलिस ठगी के इस बड़े मामले को सुलझाने में जुटी थी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ठगी की रकम लगभग 6 करोड़ बताई जा रही है। इस लिहाज से यह प्रदेश में अभी तक का ठगी का सबसे बड़ा मामला होगा।
बुजुर्ग दंपती पहुंची थी पुलिस के पास तब सामने आया था मामला
हर महीने 45 हजार रुपए किराया और बेटों को ऊंचे ओहदे पर नौकरी मिलने की चाहत में शहर का एक बुजुर्ग दंपती अपने जीवनभर की कमाई लुटा बैठा था। 10-20 नहीं, पूरे 62 लाख रुपए ठगी का शिकार हो गए। दिल्ली के 10 लोगों के इस ठग गिरोह, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं, बुजुर्ग दंपती को अपनी जाल में ऐसा फंसाया कि खुर्सीपार की यह दंपती 37 किस्तों में उनके बताए बैंक खातों में मुंहमांगी रकम जमा कराते चले गए। पति की मौत हो जाने के बाद अब वृद्धा ने अपनी पंूजी वापस दिलवाने पुलिस से गुहार लगाई थी। ठग गिरोह को पकडऩे पुलिस की टीम दिल्ली और नोएडा सहित अन्य राज्यों की खाक छान रही थी।
फोन पर किया था संपर्क
वर्ष 2015 में पहली बार भिलाई खुर्सीपार की रहने वाली वृद्धा के पति के मोबाइल नंबर पर दिल्ली से देवेन्द्र जैन नाम के एक व्यक्ति का फोन आया। उसने कहा कि घर की छत पर भारती और रिलायंस कंपनी का मोबाइल टावर लगवाने पर हर महीने 45 हजार रुपए किराया मिलेगा।
साथ ही उनके दोनों बेटों को कंपनी ऊंचे ओहदे पर नौकरी भी देगी। लेकिन इसके लिए एचडीएफसी कंपनी का इश्योरेंस प्लान भी लेना होगा। पहली बार 96 हजार 890 रुपए भारती कंपनी और 88 हजार 435 रुपए रिलायंस कंपनी के नाम पर देवेंद्र ने खाते में जमा करवाया। वर्ष 2015 में ठगी का यह सिलसिला शुरू हुआ जो चार साल तक चलता रहा। आखिरी किस्त 2 लाख 85 हजार 500 रुपए वृद्धा ने 19 जून 2019 को जमा किया।
बाद में देवेन्द्र जैन पूरी रकम लौटाने की बात कहते हुए 62 लाख 94 हजार 500 रुपए का चेक भेजा। पहले एक्ससिस बैंक का 18 लाख 75 हजार और फिर बाद में ओरिएंटल बैंक का 62 लाख 94 हजार 500 रुपए का चेक भेजा, लेकिन दोनों ही चेक बाउंस हो गए। इसके बाद फिर अजीत मेहरा ने फोन पर कहा कि मैं डीडी भेज दे रहा हंू। उसने 72 लाख 68 हजार 432 रुपए का डीडी भेजा, लेकिन वह भी फर्र्जी निकला।
गिरोह के लोग ऐसे लेते रहे झांसे में
पहली बार इंश्योंरेंस पॉलिसी लेना अनिवार्य के नाम पर पैसे जमा करवाए।
फाइल निकालना है इंट्रेस्ट के तौर पर पैसे देने होंगे।
चालान के लिए पैसे जमा करने होंगे।
चालान जमा करने में देरी हो गई पेनाल्टी लगेगी।
आयकर विभाग से बोल रहा हंू, पैसे वापस चाहिए तो कुछ शुल्क जमा करने होंगे।
कंपनी का फाइनेंस अफसर बनकर कहा कि पूरी रकम वापस मिलने वाली है , कुछ राशि जमा करनी होगी।
एनओसी, चालान और जीएसटी के नाम पर रकम जमा करने कहा।